

कोलकाता: कोलकाता के नए शेरिफ के रूप में प्रख्यात फिल्म निर्देशक गौतम घोष की नियुक्ति की घोषणा की गई है। उन्हें शुक्रवार को इस सम्मानजनक पद के लिए आधिकारिक पत्र प्राप्त हुआ। कोलकाता का शेरिफ पद एक गैर-राजनीतिक और प्रतिष्ठित पद है, जिसकी परंपरा ब्रिटिश शासन काल से चली आ रही है।
शहर में शेरिफ का चयन हर वर्ष उच्च न्यायालय की सिफारिश और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद किया जाता है। तीन नामों के पैनल में से राज्यपाल एक व्यक्ति को इस पद के लिए चुनते हैं। यह नियुक्ति केवल एक वर्ष के लिए होती है। इसके इतिहास में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं, जिनमें राजनेता शोभन चटर्जी, लेखक मणिशंकर मुखोपाध्याय और अभिनेता रंजीत मल्लिक जैसे व्यक्ति भी शामिल रहे हैं।
गौतम घोष फिलहाल अपनी पुरानी फिल्म के रेस्टोरेशन प्रोजेक्ट के सिलसिले में चेन्नई जा रहे हैं। इस बारे में उन्होंने कहा कि “लौटने के बाद मैं संबंधित विभाग से संपर्क कर अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी लूंगा। अगर अवसर मिला तो शहर की धरोहरों के संरक्षण और सांस्कृतिक मामलों में योगदान देने का प्रयास करूंगा।”
निर्देशक का यह मानना है कि शेरिफ पद केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता शहर की धरोहरों, कला और संस्कृति के संरक्षण पर होगी।
कोलकाता में शेरिफ का पद ऐतिहासिक रूप से शहर के समाजसेवी और प्रतिष्ठित नागरिकों को दिया जाता रहा है, जो समाज और संस्कृति के प्रति योगदान देने के लिए पहचाने जाते हैं। गौतम घोष की नियुक्ति इस परंपरा को आगे बढ़ाने और कोलकाता की सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस तरह, गौतम घोष न केवल फिल्म जगत में अपनी पहचान रखते हैं, बल्कि अब कोलकाता के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं।