

चेन्नईः भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने 2027 विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर संशय जताते हुए कहा कि तेजी से बढ़ती टी20 लीग और आईसीसी द्वारा हर साल किसी बडे टूर्नामेंट को बढ़ावा देने के कारण अत्यधिक क्रिकेट की वजह से यह प्रारूप अपनी जगह खो चुका है।
अश्विन का मानना है कि टी20 लीग और टेस्ट क्रिकेट की अपनी प्रतिष्ठा बरकरार रखने के चलते वनडे क्रिकेट लगभग गैर जरूरी सा हो गया है।
अश्विन ने अपने हिंदी यूट्यूब चैनल ‘ऐश की बात’ में कहा, ‘‘2027 विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट का भविष्य क्या होगा, इसको लेकर मैं निश्चित नहीं हूं। मैं इसे लेकर थोड़ा चिंतित हूं। मैं विजय हजारे ट्रॉफी देख रहा हूं, लेकिन जिस तरह मैंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी देखी, उसी तरह इसे देख पाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह भी समझना होगा कि दर्शक क्या देखना चाहते हैं। मुझे लगता है टेस्ट क्रिकेट के लिए अब भी जगह है, लेकिन वनडे क्रिकेट के लिए सच में जगह नहीं बची है।’’
रोहित-कोहली जैसे स्टार खिलाड़ियों की जरूरत
सभी प्रारुपों में 765 विकेट लेने वाले भारत के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज अश्विन का कहना है कि किसी खेल को दर्शकों से जोड़ने के लिए स्टार खिलाड़ियों की जरूरत होती है और इसके लिए उन्होंने हाल में रोहित शर्मा और विराट कोहली के विजय हजारे ट्रॉफी मैच में खेलने से उमड़ी दर्शकों की भीड़ का उदाहरण दिया। इन दोनों खिलाड़ियों के नाम मिलाकर 86 वनडे शतक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देखिए, रोहित और विराट जब विजय हजारे ट्रॉफी खेलने आए तो लोगों ने इसे देखना शुरू किया। हमें पता है कि खेल हमेशा खिलाड़ियों से बड़ा होता है, लेकिन कई बार खेल को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए इन खिलाड़ियों (रोहित और विराट) की वापसी की जरूरत होती है। ’’
धोनी ने भी बनाया था वनडे को आकर्षक
अश्विन ने कहा, ‘‘विजय हजारे ट्रॉफी एक घरेलू वनडे टूर्नामेंट है जिसे ज्यादा लोग नहीं देखते। लेकिन विराट और रोहित के खेलने की वजह से लोग इसे देखने पहुंचे। फिर सवाल यह है कि जब वे वनडे खेलना बंद कर देंगे, तब क्या होगा? ’’ इससे पूर्व क्रिकेटर ने कहा कि एक समय 50 ओवरों का क्रिकेट एक शानदार प्रारूप हुआ करता था जिससे महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी सामने आए जो पारी को संभालना जानते थे।
उन्होंने कहा, ‘‘वनडे क्रिकेट कभी एक बेहतरीन प्रारूप था जिसने धोनी जैसा खिलाड़ी दिया जो 10–15 ओवर तक सिर्फ एक एक रन लेकर पारी को संभालता था और अंत में विस्फोटक बल्लेबाजी करता था। अब ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं और अब वैसी बल्लेबाजी की जरूरत भी नहीं है क्योंकि अब दो नयी गेंदें होती हैं और सर्कल के अंदर पांच क्षेत्ररक्षक रहते हैं। ’’
हर साल टूर्नामेंट होने से बड़ा फर्क
अश्विन ने साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से व्यावसायिक हितों से प्रभावित हुए बिना अपने कैलेंडर पर पुनर्विचार करने की अपील की क्योंकि उन्हें लगता है कि काफी ज्यादा विश्व कप हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब लगभग हर साल आईसीसी टूर्नामेंट होने का मुख्य कारण राजस्व बढ़ाना है जबकि 2025 के कैलेंडर में पुरुषों की चैंपियंस ट्रॉफी और महिलाओं का वनडे विश्व कप शामिल था और 2026 में पुरुषों और महिलाओं दोनों का टी20 विश्व कप होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘वनडे प्रारूप अब गैरजरूरी सा हो गया है और आईसीसी जिस तरह से विश्व कप आयोजित कर रहा है, उसे इस पर भी ध्यान देने की दरकार है। हर साल राजस्व के लिए कोई आईसीसी टूर्नामेंट कराया जाता है। फीफा को देखिए। वहां अलग लीग होती हैं और विश्व कप चार साल में एक बार होता है। इसलिए विश्व कप का अपना अलग महत्व है।’’ अश्विन के कहा, ‘‘बहुत ज्यादा द्विपक्षीय श्रृंखलाएं, बहुत ज्यादा प्रारूप और बहुत ज्यादा विश्व कप, यह सब मिलकर अत्यधिक हो गया है।’’
चार साल में एक विश्व कप हो
जहां सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज वनडे में पारी को बांटने के प्रारूप का सुझाव दे चुके हैं वहीं अश्विन का मानना है कि चार साल में सिर्फ एक वनडे विश्व कप ही इस प्रारूप को बचा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप सच में वनडे क्रिकेट को प्रासंगिक बनाना चाहते हैं तो ये टी20 लीग खेलिए और चार साल में सिर्फ एक बार वनडे विश्व कप कराइए। जब लोग इसे देखने आएंगे तो उनके अंदर उत्साह और उम्मीद होगी। वर्ना मुझे लगता है कि वनडे क्रिकेट धीरे धीरे खत्म होने की कगार पर है।’’