कौन हैं सैयद अता हसनैन जिन्होंने ली बिहार के राज्यपाल की शपथ

पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने लोक भवन में आयोजित एक समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को राज्यपाल के पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
पटना में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन राज्यपाल पद की शपथ लेते हुए।
पटना में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन राज्यपाल पद की शपथ लेते हुए।
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पटनाः लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने शनिवार को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली। पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने लोक भवन में आयोजित एक समारोह में हसनैन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। हसनैन ने आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लिया है।

समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे। सेना में हसनैन की अंतिम तैनाती सैन्य सचिव के रूप में थी जो वरिष्ठ स्तर के कार्मिक प्रबंधन के लिए जिम्मेदार एक महत्वपूर्ण पद है। इससे पहले, उन्होंने जम्मू कश्मीर में सेना की 15 कोर की कमान संभाली थी।

सेवानिवृत्ति के बाद भी हसनैन राष्ट्रीय और शैक्षणिक भूमिकाओं में सक्रिय रहे। उन्हें 2018 में केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था। वह 2020 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य के रूप में शामिल हुए थे।

पटना में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन राज्यपाल पद की शपथ लेते हुए।
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विस्तार से जानिये हसनैन साहब को

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक अत्यधिक सम्मानित पूर्व वरिष्ठ अधिकारी (Three-star General) और राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 40 वर्षों तक सेना में सेवा दी, जिसमें जम्मू-कश्मीर में 15वीं कोर की कमान संभालना और 'हार्ट्स एंड माइंड्स' (Hearts and Minds) की नीति अपनाना शामिल है। 

हसनैन का सैन्य करियर

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने 2013 में सेवानिवृत्ति के बाद सैन्य सचिव के रूप में कार्य किया। वे कश्मीर घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए प्रसिद्ध रहे।

उन्होंने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पढ़ाई की। वे एक सैन्य परिवार से हैं और मेजर जनरल सैयद महदी हसनैन के पुत्र हैं। उन्हें पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम (बार) जैसे उच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

प्रखर सामरिक विश्लेषक

2018 में कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और 2020 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य रह चुके हैं। वे एक प्रखर सामरिक विश्लेषक, टीवी विश्लेषक और कई प्रमुख मीडिया घरानों के लिए लेखक भी रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक मामलों पर अपने विचारों के लिए जाने जाते हैं। 

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