मुंबई के महापौर पद के चुनाव में क्या होगी लॉटरी की भूमिका?

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों के महापौरों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और महापौर पद किस श्रेणी में जाएगा इसका फैसला 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए होगा।
मुंबई के महापौर पद के चुनाव में क्या होगी लॉटरी की भूमिका?
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मुंबईः महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों के महापौरों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और महापौर पद किस श्रेणी में जाएगा इसका फैसला 22 जनवरी को लॉटरी के जरिए होगा। शहरी विकास विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा है कि यह काम लॉटरी के जरिये राज्य सचिवालय (मंत्रालय) में होगा।

महाराष्ट्र में महापौरों का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है और यह पद रोटेशन के आधार पर आरक्षण के अधीन होता है। लॉटरी के माध्यम से यह निर्धारित किया जाता है कि महापौर का पद किस श्रेणी के लिए आरक्षित होगा, जैसे सामान्य, महिला, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और ओबीसी श्रेणी। श्रेणी की घोषणा होने के बाद, पात्र उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल करते हैं।

इसके बाद, नगर निकायों के निर्वाचित पार्षदों की एक विशेष बैठक में चुनाव आयोजित किया जाता है। सदन की कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक मत हासिल करने वाला उम्मीदवार महापौर निर्वाचित होता है। किसी भी एकल पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में गठबंधन निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

मुंबई में, 15 जनवरी को हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कुल 227 सीटों में से 89 सीटों पर जीत हासिल की है और करीब 30 वर्षों के बाद ठाकरे परिवार से देश के सबसे अमीर नगर निकाय का नियंत्रण छीन लिया है। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने 29 सीटें हासिल की हैं। राज्य के 29 नगर निकायों में हाल में चुनाव हुए हैं।

शिंदे ने कहा महायुति का ही मेयर होगा

इधर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव परिणाम आने के बाद नये राजनीतिक समीकरण की खबरों को खारिज करते हुए सोमवार को कहा कि मुंबई में महायुति का महापौर होगा। शिंदे ने संवाददाताओं को बताया कि जिन नगर निकायों में शिवसेना और भाजपा ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, उनमें महायुति गठबंधन के महापौरों को नियुक्त किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना जनादेश के खिलाफ नहीं जाएगी। शिंदे का यह बयान बीएमसी में भाजपा-शिवसेना गठबंधन द्वारा मामूली बहुमत हासिल करने के बाद, शिवसेना के 29 निर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक होटल में स्थानांतरित किए जाने को लेकर जारी बहस के बीच आया है। चुनाव परिणाम पिछले सप्ताह शुक्रवार को घोषित किये गए थे।

ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिंदे शिवसेना के लिए बीएमसी महापौर का पद कम से कम पहले ढाई साल के लिए सुनिश्चित करना चाहते हैं, क्योंकि यह पार्टी के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष है। शिंदे ने संवाददाताओं से कहा, ‘शिवसेना और भाजपा ने बीएमसी चुनाव गठबंधन के तहत लड़ा था, इसलिए महायुति के उम्मीदवार महापौर बनेंगे। ठाणे, कल्याण-डोम्बिवली, उल्हासनगर और अन्य नगर निकायों में भी यही निर्णय लिया जाएगा, जहां गठबंधन ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था।’

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