विश्वगुरु बने रहने के लिए मोहन भागवत ने किस बात पर दिया जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से एक समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर विरासत में मिली है और साधु-संतों से मार्गदर्शन मिलता रहा है।
विश्वगुरु बने रहने के लिए मोहन भागवत ने किस बात पर दिया जोर
Published on

मुंबईः राष्ट्रवादी स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि जब तक धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, देश ‘विश्वगुरु’ बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसा आध्यात्मिक ज्ञान दुनिया के दूसरे हिस्सों में नहीं पाया जाता। भागवत ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि धर्म ही पूरे ब्रह्मांड को चलाता है और सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को अपने पूर्वजों से एक समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर विरासत में मिली है और साधु-संतों से मार्गदर्शन मिलता रहा है। उन्होंने कहा, "जब तक ऐसा धर्म भारत का मार्गदर्शन करता रहेगा, तब तक भारत 'विश्वगुरु' बना रहेगा। दुनिया के पास इस तरह का ज्ञान नहीं है क्योंकि उसमें आध्यात्मिकता की कमी है। यह हमारे पूर्वजों की विरासत है, जो हमें मिली है।” भागवत ने कहा, ‘चाहे वह नरेन्द्र भाई हों, मैं हूं, आप हों या कोई और, हम सभी को एक ही शक्ति चला रही है। यदि वाहन उस शक्ति से चले, तो कभी कोई दुर्घटना नहीं होगी। वह चालक धर्म है।’

धर्म पूरे ब्रह्मांड का चालक

भागवत ने कहा, “धर्म पूरे ब्रह्मांड का चालक है। जब सृष्टि की उत्पत्ति हुई, तो वह नियम जो उसकी कार्यप्रणाली को नियंत्रित करते थे, वही धर्म बने। सब कुछ उसी सिद्धांत पर चलता है।” भागवत ने कहा कि धर्म केवल धार्मिकता तक सीमित नहीं है और प्रकृति में हर किसी का अपना नैतिक कर्तव्य व अनुशासन होता है।

उन्होंने कहा कि राज्य धर्मनिरपेक्ष हो सकता है, लेकिन कोई भी मानव या कोई भी सृष्टि धर्म रहित नहीं हो सकती। भागवत ने कहा, “पानी का धर्म है बहना, आग का धर्म है जलाना। पुत्र का कर्तव्य है, शासक का कर्तव्य है और आचार-व्यवहार के नियम होते हैं। हमारे पूर्वजों ने इन नियमों को आध्यात्मिक शोध और महान प्रयासों के माध्यम से समझा।”

जाति प्रथा खत्म करने की अपील

एक दिन पहले छत्रपति संभाजीनगर में बोलेत हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अगर जातिगत भेदभाव को खत्म करना है तो सबसे पहले जाति को मन से मिटाना होगा। भागवत ने शनिवार को यहां आयोजित जन संगोष्ठी में कहा, "पहले जाति का संबंध पेशे और काम से था, लेकिन बाद में इसने समाज में पैठ बना ली और भेदभाव का कारण बनी।" यह संगोष्ठी आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने जनता के साथ संवाद किया। भागवत ने जातिवाद की समस्या पर बात करते हुए लोगों से अपील की कि वे इसे अपने मन से निकाल दें। उन्होंने कहा, "इस भेदभाव को खत्म करने के लिए, जाति को मन से मिटाना होगा। यदि इसे ईमानदारी से किया जाता है, तो 10 से 12 वर्षों में जातिवाद समाप्त हो जाएगा।”

विश्वगुरु बने रहने के लिए मोहन भागवत ने किस बात पर दिया जोर
सिंगूर में प्रधानमंत्री मोदी, अमृत भारत ट्रेनों को दिखाई हरी झंडी

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in