

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में दूसरे चरण के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान भारी उत्साह देखने को मिला है। कुल 6100 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है, जिससे साफ है कि इस बार चुनाव बेहद प्रतिस्पर्धी होने जा रहा है। दूसरे चरण (142 सीटों) के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 9 अप्रैल 2026 तय की गई थी। इसके बाद 10 अप्रैल को स्क्रूटनी (जांच) और 13 अप्रैल तक नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले 142 सीटों पर भारी संख्या में उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। खासकर कोलकाता और आसपास की हाई-प्रोफाइल सीटों पर उम्मीदवारों की लंबी कतार ने चुनाव को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस चरण में शहरी, अर्ध-शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की बड़ी हिस्सेदारी है।
हाई-प्रोफाइल सीटों पर सबकी नजर
कोलकाता की कई प्रमुख सीटें इस चरण में शामिल हैं, जहां मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है जिनमें भवानीपुर, इंटाली, मानिकतला, खड़दह, कमरहट्टी और दमदम क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों पर औसतन 10 से 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला काफी कड़ा हो गया है।
उत्तर व दक्षिण 24 परगना
जिलें में संदेशखाली, हिंगलगंज, बारासात, बनगांव दक्षिण आदि सीटें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के उतरने से चुनाव त्रिकोणीय से बहुकोणीय हो गया है।
हावड़ा-हुगली बेल्ट
उत्तरपाड़ा, उलूबेड़िया (उत्तर, दक्षिण, पूर्व),चंदननगर आदि औद्योगिक और शहरी प्रभाव वाले इन इलाकों में भी राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीयों ने टक्कर को और रोचक बना दिया है।
अन्य चर्चित सीटें
सोनारपुर दक्षिण, बाली (हावड़ा क्षेत्र) में भी उम्मीदवारों की संख्या दो अंकों में पहुंच चुकी है, जिससे परिणाम को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
प्रमुख सीटों पर उम्मीदवारों की लंबी कतार
भवानीपुर, खड़दह, सोनारपुर दक्षिण जैसी सीटों पर 10 से ज्यादा उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। वहीं कुछ क्षेत्रों में यह संख्या 12–15 तक पहुंच गई है। इससे साफ है कि इस बार मतदाताओं के पास कई विकल्प मौजूद हैं।
निर्दलीयों ने बढ़ायी राजनीतिक चुनौती
चुनाव में केवल बड़े दल ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इससे कई सीटों पर वोटों का बंटवारा तय माना जा रहा है, जो परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
क्यों अहम है दूसरा चरण?
इस चरण में शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र ज्यादा हैं। कई सीटों पर बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। कोलकाता की सीटों का असर पूरे राज्य की राजनीति पर पड़ता है।
बहुकोणीय मुकाबले से परिणाम होंगे चौंकाने वाले
विशेषज्ञों का मानना है कि उम्मीदवारों की भारी संख्या के कारण कई सीटों पर वोटों का बिखराव होगा। इससे मुकाबला करीबी और परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। कुल मिलाकर, दूसरे चरण का चुनाव अब केवल राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुकोणीय संघर्ष बन चुका है, जहां हर सीट पर कड़ी टक्कर और सस्पेंस देखने को मिलेगा।