सोमवार शाम से थमेगा दूसरे चरण का प्रचार, 142 सीटों पर निर्णायक मुकाबला

स्टार उम्मीदवारों की सीधी टक्कर कोलकाता बना रणभूमि, दिग्गज आमने-सामने

सोमवार शाम से थमेगा दूसरे चरण का प्रचार, 142 सीटों पर निर्णायक मुकाबला
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केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होना है, जिसे लेकर चुनावी माहौल चरम पर पहुंच गया है। 27 अप्रैल की शाम से प्रचार थमने के साथ साइलेंस पीरियड लागू हो जाएगा। चुनाव आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इस चरण में भवानीपुर समेत कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी जैसे दिग्गजों की सीधी टक्कर ने मुकाबले को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है, जबकि Kolkata चुनावी रणभूमि के केंद्र में है।

हाई-प्रोफाइल सीटों पर टिकीं सबकी नजरें

दूसरे चरण में कई सीटें बेहद अहम मानी जा रही हैं। भवानीपुर में Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari आमने-सामने हैं।

इंटाली, मानिकतला और काशीपुर-बेलगछिया सीट शहरी वोट बैंक की परीक्षा बन गई हैं, जबकि बैरकपुर, खड़दह और दमदम में औद्योगिक बेल्ट की राजनीति दांव पर है। सोनारपुर, भांगड़ और डायमंड हार्बर में ग्रामीण-शहरी समीकरण निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

दिग्गजों की सीधी एंट्री

इस चरण में भाजपा, तृणमूल, वाम दल और कांग्रेस सभी ने अपने बड़े चेहरों को मैदान में उतारा है। भाजपा से शुभेंदु अधिकारी, प्रियंका टिबड़ेवाल और रूपा गांगुली चुनाव लड़ रही हैं, जबकि तृणमूल की ओर से ममता बनर्जी समेत कई मंत्री स्तर के नेता मैदान में हैं। वाम दलों का नेतृत्व मोहम्मद सलीम कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस के Adhir Ranjan Chowdhury सीमित सक्रियता के बावजूद चर्चा में हैं।

सबसे हॉट सीट भवानीपुर पर सीधी टक्कर

भवानीपुर सीट इस चरण का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। यहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला है। दोनों नेताओं ने पदयात्रा और शक्ति प्रदर्शन के जरिए अपनी ताकत दिखाई है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच चुनावी माहौल और भी गर्म हो गया है।

स्टार प्रचारक : राष्ट्रीय नेताओं की एंट्री

दूसरे चरण में प्रचार को धार देने के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भी जोर लगाया। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने रैलियां कीं। तृणमूल की कमान ममता बनर्जी के साथ Firhad Hakim और उनकी ही पार्टी के अन्य नेताओं ने संभाली। वामपंथ की ओर से मोहम्मद सलीम सक्रिय रहे।

साइलेंस पीरियड से पहले जोर

27 अप्रैल की शाम से प्रचार का शोर थम जाएगा। उससे पहले सभी दलों ने रैलियों और रोड शो के जरिए पूरी ताकत झोंक दी है। लास्ट-मिनट वोट मैनेजमेंट और बूथ स्तर की रणनीतियों पर खास फोकस किया जा रहा है।

सुरक्षा और तैयारियां पूरी

चुनाव आयोग ने दूसरे चरण के मतदान के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित हो सके।

प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दूसरा चरण

दूसरे चरण का चुनाव केवल सीटों का नहीं, बल्कि बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। अब 29 अप्रैल को मतदाता तय करेंगे कि ममता बनर्जी अपनी पकड़ बरकरार रख पाएंगी या फिर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी कोई बड़ा उलटफेर कर पाएंगे।

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