अपने बूथों पर हारे दिग्गज, दलों की बढ़ी चिंता

भाजपा को मिली मनोवैज्ञानिक बढ़त विधानसभा जीते कई चेहरे, मगर अपने बूथ पर हारे
अपने बूथों पर हारे दिग्गज, दलों की बढ़ी चिंता
Published on

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : विधानसभा चुनाव के बूथवार नतीजों ने बंगाल की राजनीति की अंदरूनी तस्वीर साफ कर दी है। कई दिग्गज नेता न सिर्फ अपने विधानसभा क्षेत्रों में कमजोर पड़े, बल्कि अपने ही बूथ पर मतदाताओं का भरोसा भी कायम नहीं रख सके। चुनाव आयोग की ओर से जारी बूथवार आंकड़ों में सबसे ज्यादा झटका तृणमूल कांग्रेस को लगा है, जबकि भाजपा ने कई प्रभावशाली नेताओं के बूथों पर बढ़त बनाकर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की है। कई नेता चुनाव जीत गए, लेकिन अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिला सके।

तृणमूल के कई बड़े चेहरे अपने बूथ पर पिछड़े

पूर्व मंत्री मदन मित्रा, शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रात्य बसु और चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे कई बड़े चेहरे अपने-अपने बूथों पर पीछे रहे। टॉलीगंज में अरूप विश्वास हार गए, वहीं उनके बूथ पर भी भाजपा ने बढ़त बनाई। राजरहाट-गोपालपुर की अदिति मुंशी, सोनारपुर दक्षिण की लवली मैत्रा, करीमपुर के सोहम चक्रवर्ती और नंदीग्राम के पवित्र कर भी अपने बूथ नहीं बचा सके।

दूसरे क्षेत्रों के वोटर भी नहीं दिला सके बढ़त

मालतीपुर से जीतीं मौसम बेनजीर नूर अपने इंग्लिश बाजार स्थित बूथ पर कांग्रेस को बढ़त नहीं दिला सकीं। बीरबाहा हांसदा, बायरन विश्वास और मधुपर्णा ठाकुर भी अपने घरेलू बूथों पर कमजोर साबित हुए।

भाजपा को बूथ स्तर पर मिली बढ़त

भवानीपुर में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की बढ़त का असर फिरहाद हकीम के बूथ तक दिखा, जहां भाजपा जीती। रासबिहारी, टॉलीगंज और कई शहरी इलाकों में भाजपा ने तृणमूल के प्रभावशाली नेताओं के बूथों पर बढ़त बनाकर संगठनात्मक मजबूती का संकेत दिया।

लेफ्ट और कांग्रेस भी नहीं बचा सके आधार

कांग्रेस नेता अधीर चौधरी अपने बूथ पर हार गए। CPM की दीप्सिता धर, मीनाक्षी मुखर्जी, कल्टन दासगुप्ता और विकास रंजन भट्टाचार्य भी अपने-अपने बूथों पर पार्टी को बढ़त नहीं दिला सके। ISF नेता नौशाद सिद्दीकी के बूथ पर भी सहयोगी CPM को हार मिली।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in