

मुंबई : मुंबई की एक सत्र अदालत ने 2017 में विमान सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले में पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू, एअर इंडिया के तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) अश्विनी लोहानी सहित कई पूर्व सरकारी और विमानन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है।
मामले में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (डिंडोशी अदालत) एम मोहिउद्दीन ने फैसले में कहा कि मामले में मजिस्ट्रेट अदालत के साल 2018 के उस आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है, जिसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई है। मजिस्ट्रेट अदालत ने केवल एअर इंडिया के कैप्टन ए कठपालिया के खिलाफ पुलिस जांच के निर्देश दिए गए थे, जबकि अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति मोहिउद्दीन ने कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश में ‘कुछ भी अवैध, अनुचित या त्रुटिपूर्ण नहीं है और इसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है।’
‘ब्रेथ एनालाइजर’ टेस्ट बिना उड़ान भरी
चालक दल के सदस्य केवी जगन्नाथराव की ओर से दायर मूल शिकायत के मुताबिक, कैप्टन कठपालिया ने 19 जनवरी 2017 को अनिवार्य उड़ान-पूर्व ‘ब्रेथ एनालाइजर’ जांच कराए बिना नयी दिल्ली से बेंगलुरु के लिए एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI-174 का संचालन किया था। शिकायत के अनुसार, बेंगलुरु में उतरने के बाद कैप्टन कठपालिया के जांच नहीं कराने की बात बताए जाने के बावजूद वह प्रतिबंधित क्षेत्र में ही रहे और उसी रात नयी दिल्ली के लिए वापसी की उड़ान AI-173 का संचालन किया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कैप्टन कठपालिया ने उड़ान के बाद होने वाली ‘ब्रेथ एनालाइजर’ जांच भी नहीं कराई और बाद में चिकित्सा अधिकारी की अनुपस्थिति में उड़ान-पूर्व जांच रजिस्टर में फर्जी प्रविष्टि की।