'बायोस्कोप' की नजर से मां दुर्गा के रूपों का दर्शन

पुरानी तकनीक, नया संदेश: 'बायोस्कोप' के जरिए मां दुर्गा की आधुनिक व्याख्या
'बायोस्कोप' की नजर से मां दुर्गा के रूपों का दर्शन
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मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : इस वर्ष दुर्गा पूजा पंडालों में भव्यता के साथ गहराई से जुड़े थीमों का प्रदर्शन हो रहा है। पारंपरिक शिल्प, आधुनिक इंस्टालेशन और सांस्कृतिक धरोहरों को समेटे पंडाल न केवल मां दुर्गा की आराधना का केंद्र बने हैं, बल्कि समाज और जीवन दर्शन का संदेश भी दे रहे हैं। कहीं पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा है, तो कहीं भारतीय दर्शन का चित्रण।

समय के साथ बदलते मां के स्वरूप, 'बायोस्कोप' थीम में जीवंत

विवेकानंद पार्क एथलेटिक क्लब की 55वीं दुर्गा पूजा का विषय इस बार 'बायोस्कोप' है, जो पुराने समय में ग्रामीण बंगाल और शहरी मेलों का लोकप्रिय मनोरंजन था। पूजा का मुख्य उद्देश्य इस लुप्त होती तकनीक के जरिए मां दुर्गा के रूप और बदलते समय के साथ उनके नए रूपों को दर्शाना है। 'समय के ढांचे में मां' इस बात को दर्शाता है कि मां दुर्गा हर युग में समाज, संस्कृति और कला के अनुरूप एक नए रूप में प्रकट होती हैं। यह पूजा परंपरा और बदलाव का सुंदर संगम है, जो नए दौर की पीढ़ी को पुरानी यादों और कला से जोड़ेगी। इस थीम के आर्टिस्ट सुभाषिश माइती हैं। 

20 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा है पंडाल

क्लब के प्रेसिडेंट तन्मय दत्ता ने बताया कि इस साल पूजा समिति अपना 55वां वर्ष मना रही है। पूरे पंडाल का बजट 20 लाख रुपये है। इसके साथ ही थीम के अनुसार लाइटिंग की जा रही है। मां दुर्गा की प्रतिमा इस बार 12 फीट ऊंची बनाई गई है, जिसे पारंपरिक रूप में सजाया गया है।

पंडाल तक कैसे पहुंचें?

यदि आप विवेकानंद पार्क एथलेटिक क्लब के पंडाल तक जाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको रवींद्र सरोवर मेट्रो स्टेशन तक आना होगा। इसके बाद वहां से बस या ऑटो का उपयोग करके हरिदेवपुर पहुंचना होगा, जहां पंडाल स्थित है। यह मार्ग सबसे सुविधाजनक और आसान है।

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