

बीजिंगः चीन ने रविवार को अमेरिका से वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को “तुरंत” रिहा करने तथा “संवाद व बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने” का आह्वान किया। मादुरो सरकार का पतन और अमेरिका द्वारा उनकी गिरफ्तारी किया जाना बीजिंग के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि मादुरो के पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज के समय से ही वेनेजुएला के साथ चीन के घनिष्ठ रणनीतिक संबंध रहे हैं।
चीनी विदेश मंत्रालय ने यहां जारी एक बयान में कहा, “अमेरिका द्वारा अपदस्थ किए गए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को जबरन हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाने पर चीन गहरी चिंता व्यक्त करता है।” इसमें कहा गया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों तथा सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।
चीन ने बताया वर्चस्ववादी कदम
बयान में कहा गया, “चीन अमेरिका से अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें तुरंत रिहा करने, वेनेजुएला सरकार को गिराने का प्रयास रोकने तथा संवाद एवं बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करने का आह्वान करता है।” इससे पहले शनिवार को मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हवाई हमलों और मादुरो तथा उनकी पत्नी की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए इसे एक वर्चस्ववादी कृत्य बताया जो अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर रूप से उल्लंघन करता है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की निंदा की
चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों और मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी की घोषणा किए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि वह एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ अमेरिका द्वारा बल का खुलेआम इस्तेमाल किए जाने और उसके राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई से बेहद स्तब्ध है तथा इसकी कड़ी निंदा करता है।
मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के इस तरह के वर्चस्ववादी कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला की संप्रभुता का गंभीर रूप से उल्लंघन करते हैं और लातिन अमेरिकी तथा कैरेबियाई क्षेत्र में शांति व सुरक्षा को खतरा पैदा करते हैं। इसने कहा, “चीन इसका कड़ा विरोध करता है। हम अमेरिका से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों तथा सिद्धांतों का पालन करने और अन्य देशों की संप्रभुता व सुरक्षा का उल्लंघन बंद करने का आह्वान करते हैं।”