अमेरिका ने इस्लामाबाद के साथ टॉयलेट पेपर से भी बुरा बर्ताव कियाः पाकिस्तानी रक्षा मंत्री

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने संसद में कहा कि इस्लामाबाद के साथ “टॉयलेट पेपर से भी बुरा बर्ताव किया गया, उसे किसी काम के लिए इस्तेमाल किया गया और फिर फेंक दिया गया”।
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ( फाइल फोटो)
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नई दिल्लीः पाकिस्तान अकसर अमेरिका को अपना करीबी मानता है। पाकिस्तान जनरल सबसे अधिक अमेरिका पर ही निर्भर रहते हैं, जैसा कि अभी हाल में भारत-पाक संघर्ष के बाद देखने को मिला कि कैसे पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ट्रंप के करीब होने के लिए लालायित थे। लेकिन अमेरिका ने पाकिस्तान को केवल अपने फायदे के लिए ही उपयोग किया, कई पाकिस्तान नेता और पत्रकार कह चुके हैं। अब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने यह कह दिया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान का ट्वलेट पेपर से भी बदतर उपयोग किया है।

बड़ी बात है कि आसिफ यह बात अपनी संसद में एक मुद्दे पर बोलते हुए कहा है। उन्होंने दो अफगान युद्धों में इस्लामाबाद की भूमिका को “एक गलती” बताया और कहा कि पाकिस्तान आज जिस आतंकवाद का सामना कर रहा है, वह उन पिछले फेसलों का नतीजा है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने 1999 के बाद, खासकर 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद के समय में, अमेरिका के साथ रिश्ते फिर से बनाने की भारी कीमत चुकाई। आसिफ ने पाकिस्तान को विदेशी झगड़ों में धकेलने के लिए पूर्व सैन्य शासकों जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि देश अपने सहयोगियों के आगे बढ़ने के बाद भी उन फैसलों का असर झेलता रहा।

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आतंकवाद तानाशाहों की गलतियों का नतीजा

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने संसद में कहा कि इस्लामाबाद के साथ “टॉयलेट पेपर से भी बुरा बर्ताव किया गया, उसे किसी काम के लिए इस्तेमाल किया गया और फिर फेंक दिया गया”। रक्षा मंत्री ने इस दावे को भी गलत बताया कि अफगान युद्धों में पाकिस्तान की भूमिका धार्मिक कमिटमेंट पर आधारित थी। उन्होंने कहा, "दो पुराने मिलिट्री तानाशाह (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ़) अफगानिस्तान युद्ध में इस्लाम के लिए नहीं, बल्कि एक सुपरपावर को खुश करने के लिए शामिल हुए थे।" उन्होंने आगे कहा, "आतंकवाद, पहले के तानाशाहों की गलतियों का नतीजा है।"

उन्होंने यह भी कहा कि देश के एजुकेशन सिस्टम को भी उन युद्धों को सपोर्ट करने के लिए एडजस्ट किया गया था, और कहा कि उन सोच में हुए बदलावों का असर आज भी दिखता है। गौरतलब है कि अमेरिका के साथ अफगान युद्ध में कूद कर पाकिस्तान ने अपने हजारों लोगों की जान गंवाई है। आज भी पाकिस्तान के उत्तरी हिस्से में पाकिस्तान तलबान आतंकियों का कहर है।

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