TMC में इस्तीफों की सुनामी! एक और राज्यसभा सांसद ने छोड़ा पद, ममता की मुश्किलें बढ़ीं

प्रकाश चिक बराइक का इस्तीफा, सुष्मिता देव और शुखेंदु शेखर रॉय पहले ही छोड़ चुके हैं पार्टी; हार के बाद TMC में बढ़ी भगदड़
TMC में इस्तीफों की सुनामी! एक और राज्यसभा सांसद ने छोड़ा पद, ममता की मुश्किलें बढ़ीं
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। गुरुवार को पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।

प्रकाश चिक बराइक जल्द ही राज्यसभा सभापति को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा, “मैं राज्यसभा सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूं। कृपया इसे स्वीकार किया जाए। राज्यसभा के उपसभापति और सचिवालय के सभी अधिकारियों का अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूं।”

लगातार बढ़ रही इस्तीफों की संख्या

प्रकाश चिक बराइक से पहले तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री से मुलाकात ने उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों को और तेज कर दिया है।

सुष्मिता देव ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वह 2014 में असम की सिलचर लोकसभा सीट से सांसद बनी थीं। 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी ने उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा, लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

शुखेंदु शेखर रॉय ने भी छोड़ी थी पार्टी

इससे पहले 8 जून को वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद शुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी और राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक हालात और जनता के जनादेश का हवाला दिया था।

रॉय ने कहा था कि भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, औद्योगिक विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जनता में असंतोष बढ़ा है, जिसके चलते पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा।

ममता बनर्जी के सामने बढ़ी चुनौती

लगातार हो रहे इस्तीफों ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर असंतोष का यह सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में और बड़े नेताओं के भी पार्टी छोड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों के बीच अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है।

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