

कोलकाता : नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान आदिवासियों के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) की परियोजनाओं में आदिवासी परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिल सका।
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि 66 भूमि अधिग्रहण मामलों की जांच में पाया गया कि 17.79 करोड़ रुपये के अनुमानित बाजार मूल्य के मुकाबले आदिवासियों को केवल 2.55 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह उन्हें करीब 15.25 करोड़ रुपये कम मिले।
इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 के तहत देय 100 प्रतिशत सोलाटियम और 12 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा भी नहीं दिया गया, जिससे आदिवासी परिवारों को लगभग 17.80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।
सीएजी ने जिला स्तर के अधिकारियों की निष्क्रियता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई मामलों में सामाजिक प्रभाव आकलन और पुनर्वास कार्ययोजना तैयार नहीं की गई।
हालांकि, ईसीएल अधिकारियों का कहना है कि भूमि की खरीद प्रत्यक्ष समझौते के जरिए और राज्य के नियमों के अनुसार की गई। सीएजी ने राज्य सरकार से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और प्रभावित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास की बेहतर निगरानी की सिफारिश की है।