पुरी के जगन्नाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी

ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर को बम हमले की धमकी एक सोशल मीडिया पोस्ट से मिलने के बाद मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी
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पुरीः ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर को बम हमले की धमकी एक सोशल मीडिया पोस्ट से मिलने के बाद मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि इस ऑनलाइन पोस्ट के संबंध में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को सामने आए फेसबुक संदेश में बीजू जनता दल (बीजद) के राज्यसभा सदस्य सुभाषीश खुंटिया और तीर्थ नगरी पुरी के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर हमले की धमकी भी दी गई थी।

फेसबुक पोस्ट के जरिये धमकी

अधिकारी के अनुसार, जिस महिला के अकाउंट से यह पोस्ट की गई थी, उसने इसमें किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया और दावा किया है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसके नाम से फर्जी यूजर आईडी बनाकर दहशत फैलाने की कोशिश की होगी। महिला के बयान के आधार पर पुलिस ने एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए पकड़ा है।

पुरी के साइबर पुलिस थाने में इस संबंध में एक मामला दर्ज करके आगे की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने कहा, “मंदिर परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।” इस बीच, सांसद खुंटिया ने कहा कि उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर पुरी के पुलिस अधीक्षक से बात की है। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति की ओर से धमकी वाली एक कॉल आयी थी।

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ओडिशा के लिए क्या है जगन्नाथ मंदिर का महत्व

जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के लिए सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन का केंद्र है, जो कलिंग वास्तुकला का अद्भुत नमूना है और अपनी रहस्यमयी परंपराओं (जैसे रथयात्रा और नवकलेवर) तथा अनोखी मान्यताओं (जैसे मंदिर की छाया का अदृश्य रहना) के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है, जो राज्य की समृद्ध परंपरा और आस्था का प्रतीक है। जगन्नाथ मंदिर यह हिंदू धर्म के चार धामों में से एक है और भगवान विष्णु (श्री कृष्ण) को समर्पित है, जहां जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की त्रिमूर्ति पूजनीय है। मंदिर कलिंग शैली की अद्भुत वास्तुकला को दर्शाता है और ओडिशा की समृद्ध कलात्मक व सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है।

आपको बता दें कि हर साल होने वाला भव्य रथयात्रा उत्सव दुनिया भर से लाखों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है, जो देवताओं की नगर यात्रा का प्रतीक है। मंदिर से जुड़े कई रहस्य हैं, जैसे हवा के विपरीत लहराता झंडा, शिखर की छाया का जमीन पर न दिखना और 'बैसी पहाचा' (22 सीढ़ियां) का प्रतीकात्मक महत्व, जो इसे अद्वितीय बनाता है। यह ओडिशा के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देता है। कह सकते हैं कि जगन्नाथ मंदिर ओडिशा की आत्मा है, जो सदियों से आस्था, संस्कृति और वास्तुकला का संगम बना हुआ है। पिछली नवीन पटनायक सरकार ने 800 करोड़ खर्च कर मंदिर परिसर का पुनरुद्धार किया है जो पर्यटकों को काफी आकर्षित कर रहा।  

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