साधारण जिंदगी की असाधारण कहानियां लिखने वाली लेखिका को बड़ा सम्मान

हिंदी की वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया के संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ को साल 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है।
ममता कालिया हिंदी साहित्य जगत की एक बड़ी लेखिका है
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नई दिल्लीः हिंदी की वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया के संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ को साल 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है। साहित्य अकादमी ने सोमवार को यह घोषणा की।

इसके साथ ही अंग्रेजी में ‘क्रिमसन स्प्रिंग’ (उपन्यास) के लिए नवतेज सरना को और उर्दू में ‘सफ़र जारी है’ (कविता) के लिए प्रितपाल सिंह बेताब को अकादमी पुरस्कार के लिए चुना गया है।

ममता कालिया के साथ ही 24 भारतीय भाषाओं के लिए इन पुरस्कारों की घोषणा की गई। इन पुरस्कारों में आठ कविता संग्रह, चार उपन्यास, छह कहानी संग्रह, दो निबंध, एक साहित्यिक आलोचना, एक आत्मकथा और दो संस्मरण की पुस्तकें शामिल हैं। साहित्य अकादमी द्वारा इस संबंध में जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पुरस्कार स्वरूप एक उत्कीर्ण ताम्रफलक, शॉल और एक लाख रूपये की राशि पुरस्कृत लेखकों को 31 मार्च 2026 को नयी दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान की जाएगी।

अकादमी द्वारा जिन लेखकों को पुरस्कारों के लिए चुना गया है उनमें असमिया भाषा के उपन्यास ‘कड़ि खेलर साधु’ के लिए देवब्रत दास, बांग्ला में ‘श्रेष्ठ कबिता’ (कविता) के लिए प्रसून बंद्योपाध्याय, ‘दोंनै लामाः मोनसे गाथोन’ (बोडो भाषा में उपन्यास) के लिए सहायसुलि ब्रह्म को और डोगरी में ‘ठाकुर सतसई’ (कविता, दोहे) के लिए खजूर सिंह ‘ठाकुर’ को यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

ममता कालिया हिंदी साहित्य जगत की एक बड़ी लेखिका है
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ममता कालिया के बारे में विस्तार से जानिये

ममता कालिया हिंदी साहित्य की एक प्रमुख और चर्चित लेखिका हैं। वे अपने सशक्त, व्यंग्यात्मक और यथार्थवादी लेखन के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक और कविता जैसे कई साहित्यिक रूपों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके लेखन में खासतौर पर मध्यमवर्गीय जीवन, महिलाओं की स्थिति, सामाजिक विसंगतियां और बदलते समाज की झलक दिखाई देती है।

ममता कालिया का जन्म 2 नवंबर 1940 को उत्तर प्रदेश के वृंदावन में हुआ था। उनके पिता विद्याभूषण अग्रवाल हिंदी और अंग्रेजी के विद्वान तथा शिक्षक थे, इसलिए घर में साहित्यिक माहौल था। इसी वातावरण का प्रभाव उनके व्यक्तित्व और लेखन पर पड़ा।

उन्होंने अपनी पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से की और बाद में अध्यापन के क्षेत्र से भी जुड़ी रहीं। वे कई वर्षों तक इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के एक कॉलेज में प्राचार्य भी रहीं।

ममता कालिया ने 1960 के दशक से लेखन शुरू किया और धीरे-धीरे हिंदी साहित्य में अपनी अलग पहचान बना ली। उनकी रचनाओं में नारी जीवन की सच्चाइयाँ, सामाजिक दबाव, पारिवारिक रिश्ते और शहरों का बदलता जीवन प्रमुख विषय रहे हैं। उनकी भाषा बहुत सहज, बोलचाल वाली और तीखी व्यंग्य शैली से भरी होती है। यही कारण है कि पाठकों को उनका लेखन बहुत वास्तविक और करीब महसूस होता है।

ममता कालिया की प्रसिद्ध रचनाएंः

उपन्यास

  • बेघर

  • नरक दर नरक

  • दौड़

  • लड़कियां

कहानी संग्रह

  • छुटकारा

  • सीट नं. छह

  • एक अदद औरत

कविता संग्रह

  • कितने प्रश्न करूं

  • नरक दर नरक (कुछ रचनाएं)

सम्मान

ममता कालिया को हिंदी साहित्य में योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें प्रमुख हैं: व्यास सम्मान, यशपाल स्मृति सम्मान, सावित्री बाई फुले सम्मान

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