स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य करने की उठी मांग

अभिभावकों और शिक्षकों ने की मांग
स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन को अनिवार्य करने की उठी मांग
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बंगीय शिक्षक समिति ने की शिक्षा मंत्री से अपील

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम मांग उठी है। 'बंगीय शिक्षक व शिक्षाकर्मी समिति' ने स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन को पत्र लिखकर राज्य के स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक फिजिकल एजुकेशन को एक अनिवार्य विषय बनाने की अपील की है।

NEP 2020 का दिया हवाला

संगठन के महासचिव स्वपन मंडल ने ईमेल के जरिए भेजी अपनी इस अपील में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का विशेष रूप से जिक्र किया है। इस नीति में स्कूल स्तर पर शारीरिक शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। उनका कहना है कि वर्तमान में इस विषय को वैकल्पिक (Optional) रखने की वजह से विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास में रुकावट आ रही है। शिक्षाकर्मी समिति ने राज्य सरकार और शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझें। संगठन ने मांग की है कि इस विषय को जल्द से जल्द सभी कक्षाओं में अनिवार्य किया जाए, ताकि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी पूरी तरह मजबूत और स्वस्थ बन सकें।

क्या है मौजूदा स्थिति और परेशानियां?

कक्षा 1 से 8 तक यह विषय अनिवार्य है और इसकी परीक्षा भी होती है। वहीं, कक्षा 9 और 10 में यह सिर्फ एक वैकल्पिक विषय है, जहां इसे चुनने और परीक्षा देने के बावजूद इसके नंबर कुल मार्क्स (एग्रीगेट स्कोर) में नहीं जोड़े जाते, जिससे इसका महत्व लगभग खत्म हो जाता है। इसके अलावा, कक्षा 11 और 12 में भी यह अन्य भाषाओं की तरह एक वैकल्पिक विषय ही बना रहता है। कुल मिलाकर कक्षा 9 से 12 तक यह कहीं भी अनिवार्य नहीं है।

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