वेनेजुएला पर अमेरिका की थी दशकों से गिद्ध दृष्टि, मादुरो ने दिया मौका

अमेरिकी विशेष बलों की कराकस में कार्रवाई के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेजुएला को “चलाएगा”।
वेनेजुएला पर अमेरिका की थी दशकों से गिद्ध दृष्टि, मादुरो ने दिया मौका
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सिडनीः वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने और उनकी गिरफ्तारी के लिए अमेरिकी विशेष बलों की कराकस में कार्रवाई के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेजुएला को “चलाएगा” जिसमें उसके प्रचुर तेल संसाधन भी शामिल हैं।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के जर्जर तेल बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए अरबों डॉलर का निवेश करने को तैयार हैं और इससे “देश के लिए पैसा कमाया जाएगा”। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है—303 अरब बैरल, जो वैश्विक भंडार का करीब 20 प्रतिशत है और सऊदी अरब से भी अधिक है।

यदि ऐसा होता है—और यह एक बड़ा ‘यदि’ है—तो यह उस टकरावपूर्ण रिश्ते का अंत होगा, जिसकी शुरुआत लगभग 30 साल पहले हुई थी।

हालांकि ट्रंप प्रशासन की यह सैन्य कार्रवाई कई मायनों में अभूतपूर्व रही, लेकिन वेनेजुएला की विशाल तेल संपदा और पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज तथा मादुरो के कार्यकाल में अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों के इतिहास को देखते हुए यह अप्रत्याशित नहीं थी।

अमेरिकी निवेश का लंबा इतिहास

वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी तट पर स्थित लगभग तीन करोड़ आबादी वाला एक गणराज्य है, जो क्षेत्रफल में कैलिफोर्निया से लगभग दोगुना है। 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में इसे अपने तेल भंडार के कारण दक्षिण अमेरिका का सबसे समृद्ध देश माना जाता था। अमेरिका सहित विदेशी कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल उद्योग में भारी निवेश किया और उसकी राजनीति में भी गहरी भूमिका निभाई। हालांकि अमेरिकी विरोध के बावजूद, वेनेजुएला के नेताओं ने अपने प्रमुख निर्यात संसाधन पर नियंत्रण बढ़ाना शुरू किया। वेनेजुएला 1960 में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के गठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश था और 1976 में उसने अपने तेल उद्योग का बड़े पैमाने पर राष्ट्रीयकरण किया। इससे एक्सॉनमोबिल जैसी अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हुआ और ट्रंप प्रशासन के हालिया दावों को बल मिला कि वेनेजुएला ने “अमेरिकी तेल चुरा लिया”।

हालांकि, आम वेनेजुएलावासियों के लिए आर्थिक समृद्धि नहीं आई। तेल उद्योग के कुप्रबंधन के कारण देश कर्ज संकट में फंसा और 1988 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का हस्तक्षेप हुआ। फरवरी 1989 में कराकस में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिन्हें कुचलने के लिए सरकार ने सेना तैनात की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार करीब 300 लोग मारे गए, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कई गुना अधिक हो सकती है।

इसके बाद वेनेजुएला का समाज अमीर तबके, जो अमेरिका के साथ सहयोग चाहता था, और मजदूर वर्ग, जो अमेरिका से स्वतंत्रता चाहता था, के बीच और अधिक बंट गया। यह विभाजन तब से वेनेजुएला की राजनीति को परिभाषित करता रहा है।

शावेज का उदय

ह्यूगो शावेज ने अपने करियर की शुरुआत एक सैन्य अधिकारी के रूप में की। 1980 के दशक की शुरुआत में उन्होंने सेना के भीतर समाजवादी ‘रेवोल्यूशनरी बोलिवेरियन मूवमेंट-200’ की स्थापना की और सरकार के खिलाफ भाषण देने लगे। 1989 के दंगों के बाद शावेज ने सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बनानी शुरू की। फरवरी 1992 में उन्होंने अमेरिका समर्थक राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज़ के खिलाफ असफल तख्तापलट किया। बाद में एक और प्रयास भी विफल रहा। शावेज दो साल जेल में रहे, लेकिन 1998 में समाजवादी क्रांतिकारी एजेंडे के साथ राष्ट्रपति पद के प्रमुख दावेदार बनकर उभरे।

शावेज वेनेजुएला और लातिन अमेरिका की राजनीति में एक प्रभावशाली शख्सियत बन गए। उनकी क्रांति ने स्पेनिश औपनिवेशिक शासन से दक्षिण अमेरिका को मुक्त कराने वाले सिमोन बोलिवार की विरासत को पुनर्जीवित किया। तेल राजस्व से खाद्य, स्वास्थ्य और शिक्षा कार्यक्रमों को सब्सिडी देने के कारण वे देश में लोकप्रिय रहे और क्षेत्र के समान विचारधारा वाले शासन में भी उन्हें सम्मान मिला।

उन्होंने क्यूबा को अरबों डॉलर मूल्य का तेल दिया, जिसके बदले हजारों क्यूबाई डॉक्टर वेनेजुएला के स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने लगे। उन्होंने वैश्विक मंचों पर अमेरिका और आईएमएफ का खुलकर विरोध किया और 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को “शैतान” तक कहा।

अमेरिका पर तख्तापलट को बढ़ावा देने के आरोप

अप्रैल 2002 में विपक्षी प्रदर्शनों के बाद शावेज को कुछ समय के लिए सत्ता से हटा दिया गया और कारोबारी पेड्रो कारमोना को राष्ट्रपति घोषित किया गया। बुश प्रशासन ने तत्काल कारमोना को मान्यता दी। हालांकि, दो दिन बाद ही शावेज, समर्थकों के भारी जनसमर्थन के साथ सत्ता में लौट आए। अमेरिका ने तख्तापलट में भूमिका से इनकार किया, लेकिन वर्षों तक यह सवाल बना रहा कि क्या उसे पहले से जानकारी थी? 2004 में सामने आए दस्तावेजों से पता चला कि सीआईए को साजिश की जानकारी थी, लेकिन भूमिका स्पष्ट नहीं हो सकी।

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मादुरो पर अमेरिकी दबाव जारी

मादुरो 2000 में नेशनल असेंबली के लिए चुने गए और शावेज के करीबी बन गए। 2012 में वे उपराष्ट्रपति बने और 2013 में शावेज की मृत्यु के बाद बेहद कम अंतर से राष्ट्रपति चुनाव जीता। हालांकि मादुरो को शावेज जैसा जनसमर्थन नहीं मिला। आर्थिक हालात बिगड़ते गए और महंगाई बेकाबू हो गई। ओबामा और ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए और 2018 तथा 2024 के चुनावों में मादुरो की जीत को मान्यता नहीं दी।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने के बाद वेनेजुएला चीन को तेल बेचने पर निर्भर हो गया। मादुरो ने कई तख्तापलट और हत्या की साजिशों को नाकाम करने का दावा किया, हालांकि अमेरिका ने किसी भी भूमिका से इनकार किया। अब ट्रंप ने मादुरो को खुले तौर पर हटाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका के वहां वित्तीय हित बने रहेंगे, वेनेजुएला की राजनीति में अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहेगा।

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