परिवहन विभाग ने लागू किया 'डीम्ड ओनरशिप' नियम

पुराने वाहन डीलरों के लिए लाइसेंस अनिवार्य, पुरानी गाड़ी बेचते समय न बरतें लापरवाही, वरना जाना पड़ सकता है जेल !
The transport department has implemented the 'deemed ownership' rule.
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: दिल्ली में हुए आत्मघाती विस्फोट की घटना ने देशभर की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इस आतंकी हमले में जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया गया, वह बिना कागजी औपचारिकता पूरी किए कई बार बेची गई थी। इस घटना से सबक लेते हुए पश्चिम बंगाल परिवहन विभाग ने पुरानी गाड़ियों के मालिकाना हक (Ownership Transfer) को लेकर अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का फैसला किया है। विभाग का मुख्य उद्देश्य किसी भी अपराध में इस्तेमाल होने वाले वाहन के असली मालिक तक बिना देरी किए पहुंचना है।

'डीम्ड ओनरशिप' यानी अब डीलरों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, राज्य में यह आम बात हो गई है कि गाड़ियां कई हाथों से गुजर जाती हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) पर नाम पुराने मालिक का ही रहता है। शहर से लेकर जिलों तक चल रहे इस 'शॉर्टकट' खेल के कारण किसी भी दुर्घटना या जघन्य अपराध के समय पुलिस के लिए असली अपराधी को ढूंढना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वहीं, गाड़ी बेचने वाले निर्दोष लोग बेवजह कानूनी पचड़े में फंस जाते हैं। परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने कहा कि इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए परिवहन विभाग ने 'डीम्ड ओनरशिप' की व्यवस्था लागू की है। अब यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गाड़ी किसी लाइसेंस प्राप्त डीलर को बेचता है, तो बिक्री के क्षण से ही उस वाहन की कानूनी जवाबदेही डीलर की होगी। यदि वह गाड़ी किसी अपराध में पकड़ी जाती है, तो इसका दायित्व पुराने मालिक पर नहीं, बल्कि डीलर पर होगा। विशेष रूप से पुरानी बसों, मिनी बसों, टैक्सियों और ऑटो के डीलरों के लिए अब लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि आम लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। उन्होंने सलाह दी है कि बिना उचित दस्तावेज और आरटीओ में हस्ताक्षर किए गाड़ी किसी को भी न सौंपें।

फर्जी डीलरों का जाल और नए कड़े नियम

आरोप है कि राज्य में करीब 1650 पुराने वाहन डीलर सक्रिय हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केवल 39 ही पंजीकृत हैं। इसी विसंगति को दूर करने के लिए विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि गाड़ी बेचने से पहले मालिक को डीलर का लाइसेंस चेक करना होगा। फॉर्म 29B और 29C का संग्रह अनिवार्य कर दिया गया है। मालिकाना हक हस्तांतरण के समय विक्रेता को आरटीओ (RTO) अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। आम जनता की सुविधा के लिए आरटीओ कार्यालयों में सप्ताह में एक दिन विशेष काउंटर खोलने का निर्देश दिया गया है।

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