PM के विदेशी दौरों में ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ का जादू, खास उपहारों से मजबूत हुए रिश्ते

बीदरी कला से रोगन पेंटिंग तक—भारत ने परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम दिखाया
PM के विदेशी दौरों में ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ का जादू, खास उपहारों से मजबूत हुए रिश्ते
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भारत ने अपने वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए इस बार सिर्फ बातचीत ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, कला और परंपरा को भी खास उपहारों के जरिए दुनिया के सामने पेश किया। प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों में दिए गए ये उपहार केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि भारत की विरासत, शिल्पकला और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बनकर उभरे।

डेनमार्क के प्रधानमंत्री के लिए — बीदरी सिल्वर वर्क वास

डेनमार्क के प्रधानमंत्री को भेंट किया गया बीदरी सिल्वर वर्क वास दक्कन की प्राचीन और उत्कृष्ट शिल्पकला का शानदार उदाहरण है। हैदराबाद क्षेत्र के कारीगरों द्वारा तैयार इस कला में काले धातु पर चांदी की महीन जड़ाई की जाती है। डेनमार्क की मिनिमलिस्टिक डिज़ाइन परंपरा के साथ यह उपहार संतुलन, सादगी और सौंदर्य का साझा संदेश देता है।

फिनलैंड के प्रधानमंत्री के लिए — कमल तालाई पिछवाई पेंटिंग

फिनलैंड के प्रधानमंत्री को दी गई कमल तालाई पिछवाई पेंटिंग राजस्थान के नाथद्वारा की आध्यात्मिक कला को दर्शाती है। कमल से भरे शांत जल का चित्रण पवित्रता, संतुलन और ध्यान का प्रतीक है—जो “हजार झीलों की भूमि” फिनलैंड के प्राकृतिक सौंदर्य से गहरा संबंध बनाता है।

यूएई नेतृत्व के लिए — भारत की कृषि विरासत

संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं को भारत की कृषि विविधता से जुड़े विशेष उपहार दिए गए।

  • गुजरात का GI टैग वाला केसर आम, जिसे “आमों की रानी” कहा जाता है

  • मेघालय के मीठे और पोषक अनानास

ये उपहार भारत की प्राकृतिक संपन्नता और कृषि परंपरा को दर्शाते हैं।

यूएई के राष्ट्रपति के लिए — रोगन पेंटिंग (ट्री ऑफ लाइफ)

कच्छ की दुर्लभ रोगन कला से बनी “ट्री ऑफ लाइफ” पेंटिंग विकास, संतुलन और जड़ों से जुड़े रहने का प्रतीक है। यह उपहार यूएई के आधुनिक विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन को दर्शाता है।

यूएई के क्राउन प्रिंस के लिए — कोफ्तगिरी कटार

उदयपुर की कोफ्तगिरी कला से सजी कटार भारत की शौर्य और शिल्प परंपरा का अनूठा उदाहरण है। सोने-चांदी की बारीक जड़ाई वाली यह कलाकृति राजपूताना विरासत को दर्शाती है और यूएई की खंजर परंपरा से भी सांस्कृतिक जुड़ाव स्थापित करती है।

भारत ने इन उपहारों के जरिए यह स्पष्ट किया है कि कूटनीति केवल नीतियों और समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और भावनात्मक जुड़ाव का भी माध्यम है।
ये पहल भारत की “सॉफ्ट पावर” को मजबूत करते हुए दुनिया के साथ रिश्तों को और गहरा बनाने का काम कर रही है।

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