

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए अप्रत्याशित संकट का प्रभाव लंबे समय तक रहने वाला है, जिससे निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर कहा कि इस संकट का सामना देशवासियों को कोरोना संकट की तरह ही करना होगा।
नरेंद्र मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि इस समस्या का समाधान कूटनीति और बातचीत से ही संभव है तथा भारत तनाव को कम करने व संघर्ष समाप्त करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में सरकार की तैयारियों के कारण आज हालात से निपटने में मदद मिल रही है।
मोदी ने सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, ‘सरकार संवेदनशील है, सतर्क है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है।’ उन्होंने कहा कि कुछ तत्व ऐसे संकट में गलत फायदा उठाने का प्रयास करते हैं, इसलिए कानून व्यवस्था से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रखा गया है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया।
कोरोना काल के समान एकजुट रहें
मोदी ने कहा, ‘इस युद्ध के कारण दुनिया में बने हालात का प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका है। इसलिए हमें तैयार रहना होगा, हमें एकजुट रहना होगा। हम कोरोना के समय भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की आवश्यकता है। धीरज, संयम और शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।’
सरकार कर रही है हर प्रयास
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल, गैस और उर्वरक से लदे जहाजों के आवागमन में चुनौती के बावजूद सरकार का प्रयास देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बहुत अधिक प्रभावित नहीं होने देने का है।
उन्होंने कहा कि देश में LPG उत्पादन बढ़ाया जा रहा है और पेट्रोल-डीजल की लगातार सुचारू आपूर्ति पर काम किया गया है। उन्होंने कहा,‘यह आवश्यक है कि भारत की संसद से इस संकट को लेकर एकमत और एकजुट आवाज में संदेश दुनिया में जाए।’
राष्ट्राध्यक्षों से हो रही है बात
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की स्थिति बनने के बाद उन्होंने स्वयं पश्चिम एशिया के अधिकतर राष्ट्राध्यक्षों से 2 बार फोन पर बात की है और उन सभी ने वहां भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। मोदी ने कहा कि प्रभावित देशों में भारत के जितने भी मिशन हैं वे निरंतर भारतीयों की मदद में जुटे हैं, वहां काम करने वाले भारतीयों, पर्यटकों को हरसंभव मदद दी जा रही है।
3,75,000 भारतीय लौटे
मोदी ने कहा, ‘युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग 1,000 भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं। इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं।’
निरंतर प्रयास
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है, वहीं 65 लाख टन से अधिक भंडारण पर काम किया जा रहा है। मोदी ने कहा, ‘सरकार का प्रयास यह है कि जहां से संभव हो, वहां से तेल और गैस की आपूर्ति होती रहे। हम अपने सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद कर रहे हैं ताकि हमारे समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें।’
परिस्थितियों का बेहतर सामना
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज देश में किसानों ने अन्न भंडार भर रखे हैं। मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि फिलहाल सभी बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार के कदमों ने भी जनता की मदद की है। हमारी कुल अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गयी है। बीते 11 वर्ष में सौर ऊर्जा उत्पादन करीब 3 गीगावॉट से 140 गीगावॉट तक पहुंच गया है। सरकार ने परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है।’