ईंधन संकट की आंच अब 'आद्यापीठ' की रसोई तक, माँ के भोग पर मंडराया संकट !

प्रतिदिन 10 हजार लोग पाते हैं प्रसाद; गैस की किल्लत देख 'डीजल चूल्हे' का विकल्प तलाश रहा प्रबंधन
The heat of the fuel crisis has now reached the kitchen of 'Aadyapeeth'.
दक्षिणेश्वर आद्यापीठ में की जा रही नरनारायण सेवा
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग, विशेषकर इराक पर इजरायल और अमेरिका के हमलों का वैश्विक असर अब बंगाल के अध्यात्मिक केंद्रों तक पहुँच गया है। एलपीजी की भारी किल्लत ने जहाँ आम जनजीवन, अस्पतालों और मिड-डे मील को प्रभावित किया है, वहीं दक्षिणेश्वर स्थित प्रसिद्ध रामकृष्ण आद्यापीठ संघ भी इस संकट से अछूता नहीं रहा।

500 दरिद्र नारायणों की सेवा अनिवार्य

आद्यापीठ की परंपरा और आद्या माँ के आदेशानुसार, प्रतिदिन कम से कम 500 असहाय 'नर-नारायणों' को माँ का प्रसाद खिलाना अनिवार्य है। इसके बिना माँ का भोग अधूरा माना जाता है। इसके अलावा, संस्थान में रहने वाले ढाई हजार से अधिक आवासीय छात्र-छात्राएं, वृद्ध, साधु-संन्यासी और कर्मचारी भी भोजन के लिए इसी रसोई पर निर्भर हैं। प्रतिदिन यहाँ दो समय मिलाकर लगभग 10 हजार से अधिक लोगों के लिए प्रसाद तैयार होता है।

डीजल चूल्हे से राह निकालने की कोशिश

रामकृष्ण आद्यापीठ संघ के ट्रस्टी बोर्ड के सचिव ब्रह्मचारी मुरल भाई ने बताया कि गैस की भारी कमी के बावजूद वे इस कोशिश में जुटे हैं कि माँ की सेवा और भक्तों का प्रसाद वितरण किसी भी हाल में न रुके। उन्होंने कहा, "गैस का संकट गहरा है, इसलिए हम डीजल के चूल्हों के इस्तेमाल पर विचार कर रहे हैं ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।" उन्होंने आशा व्यक्त की कि माँ की कृपा से यह वैश्विक संकट जल्द टलेगा और सब कुशल मंगल होगा।

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