

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुई कथित नियम विरुद्ध नियुक्तियों की जांच के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि वाममोर्चा के 34 साल के शासन और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों की पूरी सूची खंगाली जाएगी। गुरुवार को विधानसभा में विश्वविद्यालयों तबादला संबंधित बिल का विपक्ष ने विरोध जताया और इसे राजनीति से प्रेरित बताया। इसी का जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि क्यों विपक्ष को इस बिल से समस्या हाे रही है, यह समझ में आ रहा है। वाममोर्चा सरकार के दौरान कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां करने के भी आरोप हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ परिवारों में 20-20 लोगों तक को नौकरियां दी गईं। उन्होंने कहा कि ऐसी सभी नियुक्तियों की जांच कराई जाएगी। केवल वाम ही नहीं बल्कि तृणमूल के शासन काल में भी कुछ ऐसा ही हाल था। यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा में सीएम ने स्पष्ट किया कि जांच किसी राजनीतिक भेदभाव के आधार पर नहीं, बल्कि नियुक्तियों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए की जाएगी। भाजपा सरकार सरकारी नौकरियों में अनियमितता की शिकायतों को गंभीरता से लेगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के दौरान किन नियुक्तियों और मामलों की पहचान होती है और सरकार आगे क्या कार्रवाई करती है।