

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले चरण के उम्मीदवारों में से कई उम्मीदवारों की संपत्ति में वर्ष 2021 के पिछले चुनाव की तुलना में वृद्धि हुई है जबकि कई उम्मीदवारों की संपत्ति घटी है। जंगीपुर सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जाकिर हुसैन ने 2026 के अपने चुनावी हलफनामे में 133 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का उल्लेख किया है जो कि पिछले बार की तुलना में लगभग दोगुनी है। वह 2026 के चुनाव में सबसे धनी उम्मीदवारों में शामिल हैं। संपत्ति में इजाफे के मामले में वह अकेले नहीं हैं। भाजपा के पुरुलिया विधायक सुदीप कुमार मुखर्जी, जो इस सीट से दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, की संपत्ति 2021 के 45 लाख रुपये से बढ़कर 2026 में 11 करोड़ रुपये पहुंच गई है, यानी संपत्ति में 2,344 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कई प्रमुख उम्मीदवार जो फिर से चुनाव मैदान में हैं, ने अपनी संपत्ति में भारी वृद्धि की घोषणा की है। उनके हलफनामों से संकलित आंकड़ों से यह पता चलता है।
उत्तर दिनाजपुर जिले के रायगंज से दोबारा चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस के कृष्ण कल्याणी की संपत्ति 2021 में लगभग 5.8 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026 में 20 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह अंतर उनकी सपंत्ति में 247 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सबंग से चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार मानस रंजन भुइयां ने 2021 के मुकाबले इस बार अपनी संपत्ति के दोगुना होकर 15 करोड़ रुपये होने का उल्लेख किया है। इसके विपरीत, विधानसभा में विपक्ष के निवर्तमान नेता शुभेंदु अधिकारी की चल संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई है।
नंदीग्राम और भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा नेता के 2026 के चुनावी शपथपत्र से पता चलता है कि उनकी आय 2020-21 में लगभग 8.13 लाख रुपये से बढ़कर 2024-25 में 17.38 लाख रुपये हो गई। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने अपनी चल संपत्ति लगभग 24.57 लाख रुपये घोषित की है, जो 2021 में दर्ज किए गए 59.31 लाख रुपये से कम है। भाजपा के सुकुमार राय, जो कूचबिहार उत्तर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, की संपत्ति में 300 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि भाजपा के चिन्मय देब बर्मन (तूफानगंज सीट) और तृणमूल कांग्रेस के बहरमपुर से उम्मीदवार सुब्रत मैत्रा जैसे उम्मीदवारों की संपत्ति में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, सभी उम्मीदवारों की संपत्ति के मूल्य में वृद्धि दर्ज नहीं की गई है। ये आंकड़े, चुनाव आयोग को प्रस्तुत किए गए स्व-घोषित शपथपत्रों पर आधारित हैं।