शास्त्रीय असमिया अध्ययन केंद्र से शोध को मिलेगा बढ़ावा

भाषा की विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और साहित्यिक शोध को मिलेगी नई गति
शास्त्रीय असमिया अध्ययन केंद्र से शोध को मिलेगा बढ़ावा
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गुवाहाटी : असमिया भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार ने तेजपुर विश्वविद्यालय में शास्त्रीय असमिया भाषा के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे असमिया भाषा के क्षेत्र में अकादमिक शोध, डिजिटलीकरण, संरक्षण और साहित्यिक विरासत के प्रसार को नई गति मिलेगी। उन्होंने इसे असम तथा देश-विदेश में रहने वाले असमिया भाषी लोगों के लिए गर्व का क्षण बताया। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक ज्ञापन को साझा करते हुए कहा कि असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद से ही राज्य सरकार इसके व्यवस्थित अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत थी। इस मंजूरी से भाषा की समृद्ध साहित्यिक और ऐतिहासिक परंपरा को अकादमिक स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

पांच शास्त्रीय भाषाओं के लिए उत्कृष्टता केंद्र

शिक्षा मंत्रालय ने शास्त्रीय असमिया के अलावा बांग्ला, पाली, मराठी और प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए भी पांच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी है। इन केंद्रों का उद्देश्य संबंधित भाषाओं में शोध को प्रोत्साहित करना, प्राचीन साहित्य और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करना, भाषाई धरोहर का संरक्षण करना तथा नई पीढ़ी तक इस विरासत को पहुंचाना है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की स्थापना से असमिया भाषा की गौरवशाली विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

तेजपुर विश्वविद्यालय के प्रयासों को मिलेगी मजबूती

तेजपुर विश्वविद्यालय ने शनिवार को जारी बयान में इस मंजूरी का स्वागत किया। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह केंद्र असमिया भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में संस्थान की एक दशक से अधिक समय से जारी शैक्षणिक और अनुसंधान संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विश्वविद्यालय में स्थापित होने वाला यह केंद्र भाषा के ऐतिहासिक विकास, साहित्यिक परंपराओं, सांस्कृतिक अभिलेखों और प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को असमिया भाषा की ऐतिहासिक यात्रा तथा साहित्यिक योगदान को समझने के लिए एक समर्पित अकादमिक मंच उपलब्ध होगा। इस पहल से असमिया भाषा की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने, दुर्लभ साहित्यिक सामग्री को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखने और भाषाई विरासत को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने के प्रयासों को संस्थागत आधार मिलने की उम्मीद है।

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