तस्लीमा नसरीन ने मोदी सरकार की खुलकर तारीफ की,कहा-मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की आजादी की प्रबल समर्थक

Taslima Nasreen
तस्लीमा नसरीन
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कोलकाता : लगभग दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में वापस लौटीं बांग्लादेशी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की खुलकर प्रशंसा की है। केंद्र सरकार वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच घिरी हुई है, लेकिन इस माहौल के बीच तस्लीमा नसरीन ने मौजूदा सरकार को अभिव्यक्ति की आजादी का प्रबल समर्थक बताया है। रविवार को कोलकाता में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपने अब तक के अनुभवों का जिक्र करते हुए लेफ्ट फ्रंट सरकार, टीएमसी सरकार और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों की आपस में तुलना की। गौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तस्लीमा नसरीन को आश्वासन दिया था कि वे जितनी बार चाहें कोलकाता आ सकती हैं और उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी वे स्वयं लेते हैं।

एक ने जाने पर मजबूर किया, दूसरी सरकार ने आने ही नहीं दिया

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तस्लीमा नसरीन  कहा कि एक सरकार ने मुझे जाने पर मजबूर किया, दूसरी ने मुझे आने नहीं दिया, और तीसरी ने मेरा स्वागत किया। मैं खुश हूं। मेरा मानना है कि भारत की मौजूदा सरकार अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखती है। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा और हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यक्रम में कोई राजनीति शामिल नहीं थी। मुझे सीएम शुभेंदु अधिकारी का धन्यवाद करना चाहिए क्योंकि उन्होंने मेरी सुरक्षा और हिफाजत सुनिश्चित की। नसरीन ने कहा कि मैंने अभी यह तय नहीं किया है कि मैं कोलकाता में रहूंगी या नहीं। नसरीन 2007 में शहर छोड़ने पर मजबूर किए जाने के लगभग दो दशक बाद कोलकाता लौटी हैं। उन्हें 2003 में 'द्विखंडितो' को लेकर हुए जबरदस्त विरोध के कारण शहर छोड़ना पड़ा था। तब से शहर में यह उनकी पहली सार्वजनिक यात्रा है।

'शुक्रिया अदा करती हूं'

तस्लीमा नसरीन ने कहा, ' आज मैं कोलकाता वापस आ गई हूं। मैंने कई सालों तक इंतज़ार किया है। मुख्यमंत्री का शुक्रिया। अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद, वे आए और मेरे लौटने पर मुझे बधाई दी। मुझे सुरक्षा देने के लिए मैं सरकार का शुक्रिया अदा करती हूं। मैं किसी राजनीतिक पार्टी का समर्थन करने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं की आजादी की वकालत करने के लिए लौटी हूं।'

लेखक की सुरक्षा अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करने के बराबर

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नसरीन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे बने रहेंगे और उन्होंने 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी की लड़ाई में भारत की भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच संबंध अच्छे रहेंगे। हम हमेशा मानते हैं कि 1971 में भारत ने हमारे लिए क्या किया था। लेकिन कुछ पाकिस्तानी जिहादी भारत के खिलाफ हैं। शनिवार को, 'सेक्युलर मिशन', 'ह्यूमन राइट्स एंड बांग्लादेश फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन' और 'पोश्चिमबोंगेर जोन्यो' द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए नसरीन ने जोर देकर कहा कि किसी लेखक की सुरक्षा करना अभिव्यक्ति और विचार की आजादी की रक्षा करने के बराबर है।

'मेरा अपराध क्या था ?'

पश्चिम बंगाल के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए, नसरीन ने कहा कि वे 1978 से राज्य के प्रकाशनों के लिए लिख रही थीं और 1980 के दशक से नियमित रूप से कोलकाता आती रही थीं। मुझे बांग्लादेश छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन मुझे यहां एक घर मिला। पश्चिम बंगाल के साथ मेरा रिश्ता नया नहीं है। 1978 में मैंने एक पत्रिका में लिखा था। 1980 से मैंने कोलकाता आना शुरू किया। 1990 के दशक में, मेरी किताब यहां लॉन्च हुई थी। लेखिका ने यह भी याद करते हुए बताया कि उन्हें 2007 में कोलकाता कैसे छोड़ना पड़ा था और कहा कि 2007 में, सरकार ने मुझे कोलकाता छोड़ने का आदेश दिया। मेरा अपराध क्या था? मैंने किसी का मर्डर नहीं किया था। यहां तक कि बांग्लादेश ने भी मेरे देश में घुसने पर रोक लगा दी थी। अगर आप सहमत नहीं हैं, तो इसके खिलाफ आवाज उठाएं, लेकिन किसी की आजादी पर रोक लगाने की कोशिश करना सही नहीं है।

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