‘बंगाल की विजय केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हिंदू समाज के संघर्ष की जीत’: तरुण विजय

‘केसरिया लहर नहीं, भारत के पुनर्जन्म का तूफान है’: भैयाजी जोशी
 ‘बंगाल की विजय केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, हिंदू समाज के संघर्ष की जीत’: तरुण विजय
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केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पाञ्चजन्य के पूर्व संपादक तरुण विजय की पुस्तक ‘Saffron Surge (केसरिया लहर)’ के विमोचन के मौके पर बंगाल में सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक और वैचारिक बदलाव की चर्चा हुई। तरुण विजय ने कहा कि बंगाल की विजय केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि अत्याचार और अंधकार के विरुद्ध हिंदू समाज के संघर्ष की विजय है। उन्होंने इसे देश के भविष्य के लिए निर्णायक बताते हुए कहा कि बंगाल का यह परिवर्तन पूरे भारत को नई दिशा और प्रकाश देगा। ईसीसीआर, कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में तरुण विजय ने कहा, “जिस तरह अयोध्या की विजय करोड़ों हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण थी, उसी तरह बंगाल का यह परिवर्तन भी देश के भविष्य के लिए निर्णायक है।” उन्होंने कहा कि बंगाल में लंबे समय तक हिंदू समाज ने अनेक कठिनाइयों और अत्याचारों का सामना किया है। अब आया परिवर्तन केवल सत्ता का बदलाव नहीं, बल्कि उस संघर्ष और प्रतिरोध की परिणति है।

‘यह लहर नहीं, तूफान है’

वरिष्ठ आरएसएस नेता भैयाजी जोशी ने पुस्तक के शीर्षक का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में आया परिवर्तन महज ‘केसरिया लहर’ नहीं, बल्कि “भारत के पुनर्जन्म का तूफान” है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन कुछ समय के लिए नहीं है। भारत अपनी मूल पहचान और गौरव की पुनर्स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भैयाजी जोशी ने कहा कि श्री अरविंद की पुस्तक ‘भारत का पुनर्जन्म’ के संदर्भ में आज भारत के पुनर्जन्म को देखा जा सकता है। उन्होंने बंगाल में “लाल निशान की जगह भगवा निशान” आने का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल की धरती ने स्वामी विवेकानंद, श्री अरविंद, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, रवींद्रनाथ ठाकुर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और खुदीराम बोस जैसे महान व्यक्तित्व देश को दिए हैं।

हिंदू संघर्ष और साहस पर केंद्रित पुस्तक

तरुण विजय ने कहा कि पुस्तक में हिंदू समाज के संघर्ष, पीड़ा, अत्याचार के विरुद्ध उसके प्रतिरोध और साहस की गाथाओं को सामने रखा गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य भारत के उस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पक्ष को सामने लाना है, जिसे लंबे समय तक अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा गया। उन्होंने पुस्तक की प्रस्तावना आरएसएस सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और उपसंहार सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा लिखे जाने को अपने लिए विशेष सम्मान बताया।

कई गणमान्य हस्तियां रहीं मौजूद

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता, उद्योग मंत्री तापस राय, सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों की राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पोती देवदत्ता चक्रवर्ती, प्रकाशक अशोक भोसले, प्रबोध ठक्कर और अनुज शर्मा समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में पुस्तक के प्रकाशन की पृष्ठभूमि और इसके पहले संस्करण से जुड़े प्रसंगों पर भी चर्चा हुई।

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