हिंदी थोपे जाने को तमिलनाडु कभी स्वीकार नहीं करेगा : उदयनिधि स्टालिन

एनईपी और तीन-भाषा फार्मूले पर केंद्र पर निशाना, तमिल-अंग्रेजी द्विभाषी नीति पर अड़े उपमुख्यमंत्री
हिंदी थोपे जाने को तमिलनाडु कभी स्वीकार नहीं करेगा : उदयनिधि स्टालिन
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तंजावुर में तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भाषा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की आलोचना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु कभी भी तीन-भाषा फार्मूले को स्वीकार नहीं करेगा और राज्य में तमिल व अंग्रेजी की द्विभाषी नीति ही लागू रहेगी।

उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करने के नाम पर तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि एनईपी को स्वीकार करने का मतलब होगा कि राज्य पर हिंदी थोपने का रास्ता खुल जाएगा, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

तंजावुर जिले के थिरुवैयारु में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) उम्मीदवार दुरई चंद्रशेखरन के समर्थन में प्रचार करते हुए उन्होंने कहा कि जनता उन्हें छठी बार भारी मतों से विजयी बनाए। उन्होंने कहा कि यदि चंद्रशेखरन 23 अप्रैल के चुनाव में 50 हजार वोटों से जीतते हैं तो वह मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन से बात कर उन्हें राज्य मंत्री बनाने की कोशिश करेंगे।

उदयनिधि ने कहा कि 2021 के चुनाव में तंजावुर जिले की आठ में से सात सीटें द्रमुक ने जीती थीं और इस बार सभी सीटों पर जीत सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि चंद्रशेखरन के जीतने पर वह हर महीने तंजावुर आकर लोगों से मिलेंगे।

इस दौरान उन्होंने अन्ना द्रमुक महासचिव ई. के. पलानीस्वामी के अनुभवहीन बताए जाने वाले बयान पर भी पलटवार किया और कहा कि उनके पास पलानीस्वामी जैसा नेताओं के पैरों में गिरकर राजनीति करने का अनुभव नहीं है।

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