

कोलकाता/नई दिल्ली : मशहूर तबला वादक उस्ताद साबिर खान का 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत जगत में गहरा शोक व्याप्त है। 4 दिसंबर 1959 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में जन्मे साबिर खान ने तबले की शुरुआती शिक्षा अपने दादा उस्ताद मसित खान से ली। इसके बाद उनके पिता उस्ताद करामतुल्ला खान ने उन्हें फ़र्रुखाबाद घराने की परंपरा में प्रशिक्षित किया।
उस्ताद साबिर खान देश के अग्रणी तबला कलाकारों में शुमार थे। उन्होंने पंडित रवि शंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, उस्ताद अमजद अली खान और गिरिजा देवी जैसे महान कलाकारों के साथ संगत की।
शास्त्रीय संगीत के अलावा उन्होंने फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने हिंदी, बंगाली और तमिल फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया और कुछ फिल्मों में गायन भी किया। कोलकाता में उन्होंने उस्ताद करामतुल्ला खान म्यूजिक सोसाइटी की स्थापना की, जहां उन्होंने कई विद्यार्थियों को तबले की शिक्षा दी।
उन्हें “तालमणि”, “आफ़ताब-ए-तबला” और “भारतनिर्माण पुरस्कार” जैसे कई सम्मान मिले। पश्चिम बंगाल सरकार ने उनके जीवन और संगीत यात्रा पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी। उनके निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक समृद्ध परंपरा को गहरा आघात पहुंचा है।