

सन्मार्ग संवाददाता
बैरकपुर : पश्चिम बंगाल की राजनीति में ठाकुरनगर स्थित ठाकुरबाड़ी में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का आगमन और पारंपरिक बंगाली व्यंजनों के साथ उनका आत्मीय भोज केवल एक सामाजिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार ठाकुरबाड़ी पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ने मतुआ समुदाय के सामाजिक, धार्मिक और विकास संबंधी मुद्दों को विशेष महत्व देते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के परिवार के आतिथ्य में आयोजित इस भोज ने राज्य सरकार और मतुआ समाज के बीच संवाद तथा निकटता का नया संदेश दिया। ठाकुरबाड़ी में मुख्यमंत्री का स्वागत पारंपरिक बंगाली व्यंजनों से किया गया। शांतनु ठाकुर की पत्नी व विधायक सोमा ठाकुर ने सुबह से ही विशेष तैयारियां की थीं। ठाकुरबाड़ी की खास डिश 'श्रृंगी पीठे' ने भी मुख्यमंत्री का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस आत्मीय मुलाकात के जरिए बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और मतुआ समाज के साथ संबंधों को महत्व देने का संदेश सामने आया। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी 1 नवंबर को ठाकुरनगर स्थित ठाकुरबाड़ी गए थे। वहां उन्होंने दूसरे वार्षिक अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाईं सम्मेलन में हिस्सा लिया था और ठाकुरबाड़ी मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।
नागरिकता से विकास तक, कई अहम घोषणाएं
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष मतुआ समुदाय की लंबे समय से चली आ रही नागरिकता संबंधी मांगों पर मुख्यमंत्री का आश्वासन रहा। शुभेंदु अधिकारी ने 31 दिसंबर तक सीएए के तहत 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता दिलाने का भरोसा दिया। इससे नागरिकता के मुद्दे पर लंबे समय से स्पष्टता और समाधान की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों में उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री ने मतुआ समुदाय के लिए 50 करोड़ रुपये की सहायता देने, चांदपाड़ा में 100 बेड का अस्पताल स्थापित करने और ठाकुरनगर को नगरपालिका बनाने की घोषणा भी की। इसके अलावा बरुणी मेले के विकास तथा महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आर्थिक सहायता से जुड़ी घोषणाएं भी की गईं। इन पहलों का उद्देश्य धार्मिक-सामाजिक केंद्र ठाकुरनगर और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं तथा स्थानीय विकास को गति देना है।
मतुआ समाज पर विशेष ध्यान
राजनीतिक दृष्टि से भी मुख्यमंत्री का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर 24 परगना के बनगांव, बागदा, गायघाटा और आसपास के क्षेत्रों में मतुआ समुदाय की बड़ी मौजूदगी है। नदिया जिले के रानाघाट, शांतिपुर, चकदह और अन्य क्षेत्रों में भी इस समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। बनगांव और रानाघाट लोकसभा क्षेत्रों में मतुआ मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते रहे हैं। आगामी महीनों में कोलकाता नगर निगम समेत कई निकायों के चुनाव और 2029 का लोकसभा चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। ऐसे में मुख्यमंत्री का ठाकुरबाड़ी पहुंचकर समुदाय के प्रतिनिधियों से संवाद करना और उनकी मांगों पर घोषणाएं करना भाजपा की व्यापक सामाजिक संपर्क पहल के रूप में देखा जा रहा है। मतुआ समाज के लिए अब इन घोषणाओं को जमीन पर उतारना महत्वपूर्ण होगा। नागरिकता प्रक्रिया में प्रगति, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और ठाकुरनगर नगरपालिका की स्थापना जैसी पहलें आने वाले समय में इस क्षेत्र के विकास की दिशा तय कर सकती हैं। इस लिहाज से ठाकुरबाड़ी का भोज आत्मीयता, सामाजिक सम्मान और विकास के एजेंडे को एक साथ सामने लाने वाला राजनीतिक-सामाजिक आयोजन बन गया है।