सुप्रीम कोर्ट में ‘उद्योग’ पर सस्पेंस, फैसला रिजर्व

उच्चतम न्यायालय के नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा के विवादास्पद मुद्दे पर अपना फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया।
सुप्रीम कोर्ट ( फाइल फोटो)
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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय के नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा के विवादास्पद मुद्दे पर अपना फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले संविधान पीठ ने तीन दिन तक चली सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं जैसे शेखर नफाड़े, इंदिरा जयसिंह, सी यू सिंह और संजय हेगड़े सहित विभिन्न वकीलों की दलीलें सुनीं। इस पीठ में प्रधान न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं।

पीठ ने कहा कि वह श्रम संबंधों को नियंत्रित करने के लिए ‘उद्योग’ शब्द की व्यापक व्याख्या देने वाले सात-सदस्यीय पीठ के 1978 के फैसले की कानूनी वैधता की जांच करेगा। सात-सदस्यीय पीठ ने 21 फरवरी, 1978 को बैंगलोर जल आपूर्ति और मलजल शोधन बोर्ड की याचिका पर फैसला सुनाते हुए ‘उद्योग’ शब्द की परिभाषा का विस्तार किया, जिससे अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, क्लबों और सरकारी कल्याण विभागों में कार्यरत लाखों कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के दायरे में आ गये।

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