

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में किसी को भी बाधा डालने की अनुमति नहीं देगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में आवश्यक आदेश या स्पष्टीकरण जारी करेगी।
पीठ ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इनमें राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है, जिसमें एसआईआर अभ्यास के दौरान मतदाता सूची से “बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने” की आशंका जाहिर की गई है। पीठ ने कहा, “हम किसी को भी एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने की अनुमति नहीं देंगे। राज्यों को यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए।”
शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे का संज्ञान लिया, जिसमें कुछ उपद्रवियों पर एसआईआर संबंधी नोटिस को जलाने का आरोप लगाया गया है। उसने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उपद्रवियों के खिलाफ अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
एसआईआर सुनवाई का समय एक सप्ताह बढ़ा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर सुनवाई को पूरा करने की डेडलाइन एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी। कोर्ट ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर अपने अंतरिम आदेश में कहा, "हम निर्देश देते हैं कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर को जांच पूरी करने और फैसला लेने के लिए 14 फरवरी के बाद एक हफ्ते का और समय दिया जाए।"
राज्य के 8,505 अधिकारियों का कामगाज चुनाव आयोग देखेगा
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह संदेश जाना चाहिए कि भारत का संविधान सभी राज्यों पर लागू होता है।” शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से निर्वाचन आयोग को ग्रुप-बी के 8,505 अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराए जाने का संज्ञान लिया। उसने कहा कि इन अधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया में प्रशिक्षित और नियोजित किया जा सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन के सिलसिले में अंतिम निर्णय हमेशा मतदाता सूची अधिकारियों द्वारा ही लिया जाएगा। उसने कहा कि इन 8,505 अधिकारियों की नियुक्ति का तरीका और कामकाज निर्वाचन आयोग द्वारा तय किया जाएगा।
ममता बनर्जी के वकील ने क्या दलील दी
सुनवाई के दौरान ममता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने एसआईआर प्रक्रिया में सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और बड़े पैमाने पर योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर आशंकाएं व्यक्त कीं। दीवान ने पीठ से कहा, “हम नहीं चाहते कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर लोगों के नाम हटाए जाएं।”
राज्य के कई SIR सुनवाई सेंटरों में तोड़फोड़
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में बंगाल में एसआईआर की सुनवाई होने वाले कई सेंटरों पर व्यापक तोड़फोड़ की गयी थी। इस मामले को लेकर पुलिस पर कड़ी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा था। विपक्षी पार्टियों ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाया था। वहीं तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममत बनर्जी ने इन घटनाओं को लोगों का स्वाभाविक गुस्सा करार दिया था।