

ईटानगर : अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 1,605 मेगावाट की सुबनसिरी अपर जलविद्युत परियोजना के लिए करीब 1.35 लाख पेड़ों की कटाई के प्रस्ताव ने पर्यावरणीय चिंताओं को सामने ला दिया है। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश तो की है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से वन संरचना, जैव विविधता, वन्यजीवों के आवागमन और पारिस्थितिकी तंत्र पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। समिति ने एनएचपीसी को पेड़ों की कटाई कम करने और प्रभावित क्षेत्रों की पारिस्थितिकी बहाली के लिए विस्तृत योजना तैयार करने को कहा है। राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) की यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में डापोरिजो से करीब 20 किलोमीटर दूर मेंगा के पास सुबनसिरी नदी पर प्रस्तावित है। परियोजना के लिए राज्य में 2,733 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की जरूरत होगी। परियोजना प्रस्ताव के अनुसार, इसके निर्माण के लिए करीब 1,35,000 पेड़ों को काटना पड़ सकता है। ईएसी ने 15 सितंबर को हुई अपनी बैठक में इस बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को विशेष रूप से रेखांकित किया।
वन्यजीवों और जैव विविधता पर असर की चिंता
समिति ने कहा कि प्रस्तावित पेड़ कटाई से क्षेत्र की वन संरचना प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा वन्यजीवों के आवागमन के रास्तों, उनके प्राकृतिक आवास की निरंतरता और स्थानीय जैव विविधता पर भी असर पड़ने की आशंका है। ईएसी ने यह भी कहा कि जंगलों से मिलने वाली विभिन्न पारिस्थितिकी सेवाओं पर परियोजना के प्रभाव का आकलन जरूरी है। इसी वजह से एनएचपीसी को निर्माण गतिविधियों के दौरान पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखने के लिए ठोस उपाय करने की सलाह दी गई है।
पेड़ कटाई कम करने की योजना बनाने का निर्देश
ईएसी ने एनएचपीसी को स्थान-विशिष्ट और समयबद्ध इकोसिस्टम रिस्टोरेशन एवं बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट प्लान तैयार करने को कहा है। योजना में परियोजना क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को यथासंभव कम करने और निर्माण से प्रभावित हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से बहाल करने के उपाय शामिल करने होंगे। समिति ने स्थानीय प्रजातियों के पौधरोपण, प्राकृतिक वन पुनर्जनन, मिट्टी एवं नमी संरक्षण और बाहरी या आक्रामक पौधों की प्रजातियों को नियंत्रित करने जैसे उपायों पर भी जोर दिया है। 5,466 हेक्टेयर में प्रतिपूरक वनीकरणपरियोजना के लिए प्रतिपूरक वनीकरण की योजना अरुणाचल प्रदेश के बजाय मध्य प्रदेश में प्रस्तावित की गई है। रिकॉर्ड के अनुसार, मध्य प्रदेश के 14 जिलों में 144 स्थलों पर 5,466 हेक्टेयर क्षरित वन भूमि में पौधरोपण किया जाना प्रस्तावित है। यह व्यवस्था वन भूमि के डायवर्जन के बदले प्रतिपूरक वनीकरण से संबंधित प्रावधानों के तहत प्रस्तावित है। परियोजना की वन मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ इस पहलू पर भी आगे निर्णय लिया जाएगा।
पर्यावरण मंजूरी वन मंजूरी से जुड़ी
ईएसी ने परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की सिफारिश की है, लेकिन अंतिम पर्यावरणीय मंजूरी वन मंजूरी के सैद्धांतिक अनुमोदन से जुड़ी होगी। यानी परियोजना के आगे बढ़ने में वन भूमि के डायवर्जन और उससे संबंधित शर्तों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह परियोजना चीन सीमा से करीब 200-220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ बाढ़ के प्रभाव को नियंत्रित करना भी है।
237 मीटर ऊंचा बांध प्रस्तावित
परियोजना के तहत सुबनसिरी नदी पर सबसे गहरी नींव से 237 मीटर ऊंचा भंडारण बांध बनाने की योजना है। पूर्ण जलाशय स्तर पर जलाशय का क्षेत्रफल करीब 22.2 वर्ग किलोमीटर और इसकी लंबाई लगभग 50 किलोमीटर होगी। भूमि अधिग्रहण से परियोजना से करीब 1,139 परिवारों के प्रभावित होने का अनुमान है।
ऊपरी सुबनसिरी में कई परियोजनाएं प्रस्तावित
सुबनसिरी ब्रह्मपुत्र नदी की प्रमुख सहायक नदियों में से एक है। इसके बेसिन में कई जलविद्युत परियोजनाओं की योजना है। अपर सुबनसिरी के ठीक ऊपर डेंगसर परियोजना प्रस्तावित है, जबकि उससे आगे ओजू, नियारे, नाबा और नालो जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। नदी के निचले हिस्से में सुबनसिरी लोअर परियोजना निर्माणाधीन है। ऐसे में अपर सुबनसिरी परियोजना के लिए प्रस्तावित बड़े पैमाने पर पेड़ कटाई को लेकर ईएसी द्वारा दिए गए पर्यावरणीय निर्देश परियोजना के आगे के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण होंगे।