

कोलकाता : राज्य विधानसभा ने शनिवार को पश्चिम बंगाल पंचायत (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। इस संशोधन के तहत ग्राम पंचायत प्रधानों के वित्तीय अधिकारों में कटौती करते हुए चेक, वित्तीय दस्तावेजों और सरकारी भुगतान पर हस्ताक्षर का अधिकार पंचायत सचिव, सहायक सचिव तथा आवश्यकता पड़ने पर बीडीओ, एसडीओ या जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा।
पंचायत मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य ग्राम पंचायतों में सत्ता के केंद्रीकरण को समाप्त करना, भ्रष्टाचार और हिंसा पर अंकुश लगाना तथा पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि अतीत में पंचायत प्रधान का पद हासिल करने के लिए धनबल का इस्तेमाल होता था, जिससे 'कट-मनी' संस्कृति को बढ़ावा मिला।
अब प्रत्येक माह आय-व्यय का संयुक्त विवरण उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। सरकार के अनुसार, राज्य की 80 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में प्रधानों की लंबे समय तक अनुपस्थिति के कारण 125-दिवसीय रोजगार कार्यक्रम और अन्य ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही थीं।
इससे परियोजनाओं की स्वीकृति, मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों के क्रियान्वयन में लगातार देरी हो रही थी। विधेयक पर चर्चा के दौरान आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने स्वीकार किया कि पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार मौजूद है, लेकिन वित्तीय अधिकार प्रधानों से लेकर अधिकारियों को सौंपने से सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण की आशंका बढ़ेगी।
वहीं, तृणमूल के बागी गुट के सदस्य अखरुज्जमान ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की। उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि पंचायतों के सुचारु संचालन के लिए सरकार के पास यह कदम उठाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं था।