निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बारासात: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष सघन संशोधन (SIR) ने आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। उत्तर 24 परगना जिले में हजारों मतदाताओं के नाम अचानक सूची से गायब होने के बाद गुरुवार को बारासात जिला शासक (DM) कार्यालय के सामने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। सबसे चौंकाने वाला मामला एक ऐसे परिवार का सामने आया है, जिसकी तीन पीढ़ियां भारतीय सेना में देश की सेवा कर चुकी हैं, फिर भी परिवार की बहू का नाम काट दिया गया है।
तीन पीढ़ियों ने दी सेना में सेवा, फिर भी 'पहचान' पर संकट
पीड़ित रमा दत्त के परिजनों ने बताया कि उनके पिता, पति और बेटे—तीनों भारतीय सेना में रहे हैं। वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम शामिल था, लेकिन नई एसआईआर सूची में उनका नाम गायब है। उनकी बहू श्रेया दत्त ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, "जिस परिवार ने देश के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, आज उन्हें अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही है।"
हजारों की भीड़, चेहरे पर चिंता की लकीरें
सिर्फ रमा दत्त ही नहीं, बल्कि बागदा के विश्वनाथ बाइन, जो स्वयं एक फौजी के बेटे हैं, और हबड़ा के विजय भौमिक जैसे हजारों लोग सुबह तड़के से ही डीएम कार्यालय के बाहर लाइन में खड़े दिखे। बनगांव, बशीरहाट और बैरकपुर जैसे दूर-दराज इलाकों से आए लोगों का एक ही सवाल था—"अगर 2002 की लिस्ट में नाम था, तो अब क्यों काटा गया?"
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि फॉर्म-6 भरकर आवेदन करने वालों के दावों की जांच की जाएगी। हालांकि, 15 दिनों की समयसीमा और तकनीकी जटिलताओं के बीच आम जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है।