SIR : सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनता की जीत है - तृणमूल

SIR : सुप्रीम कोर्ट का फैसला जनता की जीत है - तृणमूल
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कहा : बंगाल की एसआईआर प्रक्रिया पर मनमानी आखिरकार टूट गई

80 लाख दावों और आपत्तियों से निपटने के लिए सुप्रीम आदेश

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बंगाल में एसआईआर में 80 लाख दावों और आपत्तियों से निपटने के लिए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दीवानी न्यायाधीशों को नियुक्त करने और पड़ोसी राज्यों झारखंड तथा ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को बुलाने की अनुमति दी। SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तृणमूल कांग्रेस ने स्वागत किया है। इस पर खुशी जतायी है। तृणमूल ने कहा है कि इस फैसले से एक बार फिर बंगाल की जनता की जीत हुई है। तृणमूल ने इस दिन कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बंगाल की मां-माटी-मानुष की एक और शानदार जीत हुई! माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर लोकतंत्र के साथ दृढ़ता से खड़े होकर चुनाव आयोग की अक्षमता और भाजपा द्वारा बंगाल की जनता को परेशान करने और मताधिकार से वंचित करने के निरंतर प्रयासों को उजागर किया है। आज का फैसला मतदान के संवैधानिक अधिकार की निर्णायक पुष्टि है और यह स्पष्ट संदेश है कि चुनावी प्रक्रियाओं में प्रशासनिक हस्तक्षेप या मनमाने मानकों के माध्यम से हेरफेर नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बंगाल के करोड़ों नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए फैसला दिया गया है। इस पर तृणमूल के कई वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रियाएं आयी है। सांसद कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य, डॉ. शशि पांजा, शोभनदेव चट्टोपाध्याय सहित ने अपने बयान जारी किये हैं। विधानसभा में मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि काम समय पर पूरा किया जाए और मतदाता सूची 28 तारीख तक जमा कर दी जाए। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि 24 फरवरी को मां माटी मानुष की एक और जीत हुई है। यह सवोच्च अदालत के फैसले से ही हो पाया है। मंत्री ने आरोप लगाया कि वोट देने की प्रक्रिया को चुनाव आयोग ‘अवैध’ तरीके से परिचालना कर रहा था, सुप्रीम कोर्ट बार बार अपने ऑर्डर के माध्यम से उसमें रोक लगा दी है। यह साबित होता है। शशि पांजा ने कहा कि हमने न्यायालय के संज्ञान में लाया था कि सॉफ्टवेयर अपलोड 14 तारीख से रोक दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। आयोग के कारण यह स्थिति उत्पन्न की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

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