बढ़ते बिजली बिलों से जूझते स्कूल हॉस्टल, सोलर समाधान की मांग तेज

फंड की कमी और भारी खर्च ने शिक्षा व्यवस्था को डाला संकट में
बढ़ते बिजली बिलों से जूझते स्कूल हॉस्टल, सोलर समाधान की मांग तेज
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कृष्णचंद्रपुर स्कूल में लाखों का बिजली बिल बना चुनौती

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित स्कूल हॉस्टल इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। सालाना बिजली बिल 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच जाने के कारण कई हॉस्टल बंद होने के कगार पर हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि स्कूलों के हेडमास्टर अब स्कूल शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन से सोलर पैनल लगाने की मांग कर रहे हैं।

बिजली बिल बना सबसे बड़ा आर्थिक बोझ

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर से दक्षिण तक कई स्कूल अपने हॉस्टलों के संचालन के लिए आवश्यक फंड जुटाने में असमर्थ हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान आवंटित बजट अब तक जारी नहीं किया गया है, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई है। विभिन्न खर्चों में बिजली का बिल सबसे बड़ा बोझ बनकर उभरा है। कृष्णचंद्रपुर हाई स्कूल के हेडमास्टर चंदन माइती ने बताया कि उनके स्कूल में कुल 5 हॉस्टल हैं, जिनमें लगभग 750 छात्र रहते हैं, जबकि स्कूल के कुल छात्रों की संख्या करीब 6000 है। उन्होंने कहा कि उनके संस्थान को हर साल 25 से 30 लाख रुपये तक का बिजली बिल चुकाना पड़ता है, जो अत्यंत चुनौतीपूर्ण है।

सोलर पैनल के लिए आवेदन, फिर भी इंतजार जारी

हेडमास्टरों का मानना है कि सोलर पैनल इस समस्या का प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान हो सकता है। हालांकि समग्र शिक्षा मिशन के तहत कुछ स्कूलों में सोलर पैनल लगाए गए हैं, लेकिन विशेष रूप से हॉस्टलों के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। चंदन माइती ने बताया कि उन्होंने सोलर पैनल के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

फंड रोकने से बढ़ी चिंता

स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा समग्र शिक्षा मिशन के लिए मिलने वाला फंड फिलहाल रोक दिया गया है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सोलर पैनल परियोजनाओं को लागू करना और भी मुश्किल हो सकता है। शिक्षकों और हेडमास्टरों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में जल्द से जल्द स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उनका तर्क है कि उपनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हॉस्टलों का महत्व अत्यधिक है और इन्हें बचाने के लिए पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा विकल्पों को अपनाना बेहद आवश्यक है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर पड़ेगा।

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