मुश्किल घड़ी में दोस्ती निभाने को तैयार रूस

रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनका देश भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए हमेशा तैयार रहा है।
रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ( फाइल फोटो )
रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ( फाइल फोटो )
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नई दिल्लीः रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनका देश भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए हमेशा तैयार रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उनका यह बयान आया है।

वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उस समय उछाल आया है जब ईरान ने व्यावहारिक रूप से होर्मुज की खाड़ी को अवरुद्ध कर दिया है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) के परिवहन का प्रमुख रास्ता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की करीब आधी आवश्यकता भी आयात से पूरी होती है। इनका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने की स्थिति भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह मानी जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख स्रोत है।

राजदूत अलीपोव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “हम हमेशा से भारत को कच्चा तेल आपूर्ति करने के लिए तैयार रहे हैं।” उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर भारत को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की। अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मुख्य रूप से इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले शुरू किए।

रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ( फाइल फोटो )
युद्ध में ईरान ने खोये 1,230 लोग, तेज किया हमला

ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों के बीच हमलों और जवाबी हमलों के कारण यह संघर्ष काफी तेज हो गया है। इसी दौरान हाल के सप्ताहों में रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात में भी तेज गिरावट देखी गई है।

पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नयी दिल्ली के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को भी वापस ले लिया था। यह शुल्क अगस्त में भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया था।

भारत का रुख हालांकि यह रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदेगा और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खरीदारी में विविधता लाएगा। सरकार का कहना है कि तेल खरीद में राष्ट्रीय हित ही मार्गदर्शक कारक रहेगा।

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