

निधि, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता: आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को लेकर पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने एक बड़ा और विस्फोटक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वह मुख्य दोषी संजय राय के लिए फांसी की सजा नहीं चाहती थीं। इस बयान के बाद जांच की दिशा और इसमें शामिल 'बड़े चेहरों' को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए रत्ना देबनाथ ने कहा, "मैंने कभी नहीं चाहा कि संजय राय को फांसी दी जाए, क्योंकि वही इस पूरी साजिश का एकमात्र चश्मदीद गवाह हो सकता है।" उनका आरोप है कि कई प्रभावशाली लोग जल्दबाजी में उसे सजा दिलवाकर उसका मुंह बंद करना चाहते थे, ताकि इस जघन्य अपराध के पीछे छिपा 'बड़ा चक्र' कभी सामने न आ सके।
पीड़िता की मां का यह बयान कलकत्ता हाई कोर्ट की उस टिप्पणी के 24 घंटे बाद आया है, जिसमें अदालत ने सीबीआई (CBI) को जरूरत पड़ने पर सजायाफ्ता संजय राय से दोबारा पूछताछ करने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोषी अभी भी बहुत कुछ जानता है, इसलिए जांच में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।
रत्ना देबनाथ ने राज्य में व्याप्त 'थ्रेट कल्चर' (धमकी की संस्कृति) और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भी तीखा हमला बोला। भावुक होते हुए उन्होंने कहा, "आज मेरी बेटी की एमडी की पढ़ाई पूरी हो जाती, वह अपना घर बसाती। अब सिर्फ यादें बची हैं। मैं केवल अपनी बेटी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के न्याय के लिए लड़ रही हूं।"
हाई कोर्ट ने जांच एजेंसी को परिवार द्वारा सौंपे गए डीएनए प्रोफाइल और ऑडियो रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है।