डिजिटल अरेस्ट होकर रिटायर्ड रेल अधिकारी ने गंवाये 48 लाख रुपये

Retired railway officer loses Rs 48 lakh after being digitally arrested
सांकेतिक फोटो REP
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बैरकपुर : 'डिजिटल अरेस्ट' का एक और खौफनाक मामला सामने आया है। इस बार ठगों ने नागेरबाजार थाना अंतर्गत एम.सी. गार्डन रोड निवासी रेलवे के एक पूर्व अधिकारी को अपना निशाना बनाया। हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति की बड़ी बेटी इंग्लैंड में 'साइबर लॉ' की पढ़ाई कर रही है, वही पिता साइबर अपराधियों के बुने जाल में फंस गए और परिवार की इज्जत बचाने के नाम पर 48 लाख रुपये गंवा दिए।

दिल्ली धमाकों में सिम इस्तेमाल होने का डर

पीड़ित के पास गत 18 फरवरी को एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई (CBI) अधिकारी बताते हुए दावा किया कि दिल्ली में हुए एक आतंकी धमाके में पीड़ित के नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल हुआ है। इतना ही नहीं, यह भी आरोप लगाया गया कि आतंकियों की मदद के बदले उनके बैंक खाते में 8 लाख रुपये आए हैं। ठगों ने पीड़ित को एक फर्जी वारंट की कॉपी भेजी और धमकी दी कि अगर वे एक घंटे के भीतर दिल्ली नहीं पहुंचे, तो कोलकाता पुलिस की स्पेशल ब्रांच उन्हें और उनके परिवार को गिरफ्तार कर लेगी।

वीडियो कॉल पर रचा 'नकली थाने' का मायाजाल

अपराधियों ने बुजुर्ग को 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा दिया। वीडियो कॉल के जरिए उन्हें फर्जी थाना, पुलिस अधिकारी और जाली दस्तावेज दिखाए गए। गिरफ्तारी से बचने के लिए उनसे बैंक खाते की पूरी रकम 'जुर्माने' के तौर पर जमा करने को कहा गया। डरे हुए पूर्व अधिकारी ने आनন-फानन में बैंक जाकर आरटीजीएस (RTGS) के जरिए पैसे भेजने शुरू कर दिए। बैंक कर्मियों ने जब पूछताछ की, तो उन्होंने डर के मारे कह दिया कि वे अपनी बेटी को पैसे भेज रहे हैं।

साइबर लॉ की छात्रा बेटी ने बचाया बाकी पैसा

जब छोटी बेटी ने इंस्टाग्राम के जरिए इंग्लैंड में पढ़ रही अपनी बड़ी बहन को इस संदिग्ध हलचल की जानकारी दी, तब जाकर सच्चाई सामने आई। साइबर लॉ की छात्रा ने तुरंत फोन कर अपने पिता को डांटा और समझाया कि वे ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसके बाद नागेरबाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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