

कोलकाता में सेकेंड अपीलेट ट्रिब्यूनल के ताजा आंकड़ों ने SIR प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ट्रिब्यूनल ने 1,474 मामलों की जांच में 1,468 वोटरों को सही ठहराया, जबकि केवल 6 नाम हटाने की सिफारिश की गई। यानी डिलीशन रेट महज 0.4% रहा।
इन आंकड़ों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस दावे को बल मिला है, जिसमें उन्होंने कहा था कि SIR के तहत बड़ी संख्या में ‘जेनुइन वोटर्स’ को निशाना बनाया जा रहा है।
ट्रिब्यूनल के फैसले ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।