

कोलकाता: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने हुगली जिले के बलागढ़ स्थित लुप्तप्राय पारंपरिक नाव निर्माण उद्योग को पुनर्जीवित करने की पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस सदियों पुरानी कुटीर उद्योग को नई पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के शिल्प सदन में हाल ही में बलागढ़ के नाव कारीगरों के साथ एक अहम बैठक हुई। इसमें लघु एवं कुटीर उद्योग विभाग, हुगली के महाप्रबंधक सुमनाथ गंगोपाध्याय, अन्य अधिकारी और नाव सहकारी समिति के मुख्य संरक्षक व इतिहास शोधकर्ता पार्थ चटर्जी मौजूद थे। कारीगरों की समस्याओं, घटती आय, आधुनिक प्रतिस्पर्धा और संभावित विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सहकारी समिति को नाव निर्माण उपकरण खरीदने के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई। आधुनिक लकड़ी कटाई मशीनें लाने, बलागढ़ में ‘बोट हब’ स्थापित करने और विश्व बांग्ला विपणन केंद्र में कारीगरों को स्टॉल देने पर भी विचार हुआ। साथ ही सरकार पारंपरिक नाव शिल्प को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग दिलाने की योजना भी बना रही है, जिससे इस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।
महानगर से करीब 115 किमी दूर हुगली नदी तट पर बसे बलागढ़, विशेषकर श्रीपुर क्षेत्र, 500 वर्ष पुरानी नाव निर्माण परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। मुगल दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने भी अपने लेखन में यहां के कारीगरों का उल्लेख किया था। सरकार की पहल से कारीगरों में नई उम्मीद जगी है और इस विरासत को बचाने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं।