चुनाव ड्यूटी में तैनात बस कर्मचारियों को मिला पोस्टल बैलेट का अधिकार

बस संगठनों ने कहा-नहीं मिल रही सीधी राहत,मतदाता सूची में विसंगतियों को लेकर ऐप कैब ऑपरेटरों ने भी किया कड़ा विरोध
Postal Ballot for Bus Crew on Poll Duty; App Cab Operators Protest Against SIR Issues
फाइल फोटो
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निधि, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चुनाव ड्यूटी में लगे बस चालकों और खलासियों के लिए पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) की सुविधा बढ़ा दी है। इस कदम से कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में तैनात लगभग 5,000 परिवहन कर्मियों को लाभ होगा, जो मतदान के दिन ड्यूटी पर होने के कारण अपने मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते थे। आयोग के निर्देशानुसार, 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए लगभग 1,500 बसों और मिनी बसों के कर्मचारियों को यह सुविधा दी जाएगी। बस मालिकों और संघों को निर्देश दिया गया है कि वे निकटतम सार्वजनिक वाहन विभाग (PVD) कार्यालय से फॉर्म 12 प्राप्त करें और इसे ड्राइवरों व खलासियों के बीच वितरित करें। इन फॉर्मों को भरकर आवश्यक दस्तावेजों, जैसे एपिक कार्ड की फोटोकॉपी और वाहन अधिग्रहण आदेश के साथ संबंधित जिला चुनाव कार्यालयों में जमा करना होगा। इसकी अंतिम समय सीमा 13 अप्रैल तय की गई है। हालांकि वेस्ट बंगाल बस व मिनी बस ऑपरेटर्स के प्रदीप नारायण बोस ने कहा कि यह सीधी राहत नहीं है क्योंकि कर्मियों को एक बार इसकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी और फिर पुनः उन्हें पोस्टल के लिए बुलाया जायेगा। प्रक्रिया को इतना जटिल न बनाकर सीधे राहत पहुंचानी चाहिए थी। वे औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर रहे हैं।

ऐप कैब ऑपरेटरों ने 'SIR' का मुद्दा उठाते हुए किया कड़ा विरोध

दूसरी ओर, चुनाव प्रक्रिया के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ऐप कैब ऑपरेटरों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। ऑपरेटरों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से कई वास्तविक परिवहन कार्यकर्ताओं और उनके नेतृत्व के नाम हटा दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखे इस पत्र में AITUC नेता नवल किशोर श्रीवास्तव ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से परिवहन कर्मियों के नाम हटाए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि BLO की अक्षमता और अपीलीय न्यायाधिकरणों की जानकारी के अभाव में पात्र मतदाता परेशान हैं। यदि वंचितों के नाम नहीं जोड़े गए, तो संगठन चुनाव ड्यूटी से सभी ऐप कैब सेवाएं वापस ले लेगा। एन.के. श्रीवास्तव ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची शामिल करने की मांग की है।

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