पूर्व सैनिकों की योजना पर सियासत तेज, राहुल ने मोदी सरकार को घेरा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि जब उन्होंने संसद में भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) से जुड़ा विषय उठाया तो मोदी सरकार ने उनके सवालों को टालने की कोशिश की।
फाइल फोटो।
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नई दिल्लीः लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि जब उन्होंने संसद में भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस) से जुड़ा विषय उठाया तो मोदी सरकार ने उनके सवालों को टालने की कोशिश की। राहुल गांधी ने बीते 20 मार्च को लोकसभा में पूछे गए अपने लिखित प्रश्न और सरकार के उत्तर की प्रति साझा करते हुए यह आरोप भी लगाया कि बकाया रकम के भुगतान में देरी के कारणों के बारे में सरकार के पास स्पष्ट जानकारी नहीं है।

राहुल गांधी ने एक पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ दिनों पहले देश की रक्षा में घायल हुए पूर्व सैनिकों से मुलाकात हुई। उन्होंने ईसीएचएस में गंभीर खामियों के बारे में बताया, जैसे प्रतिपूर्ति में देरी, दवाइयों की कमी, अस्पतालों का इलाज से इनकार या बकाया राशि का भुगतान नहीं होने के कारण योजना से बाहर हो जाना।’’ उन्होंने कहा कि 72 लाख से भी अधिक पूर्व सैनिक और उनके परिवार अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इस योजना पर निर्भर हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ मैंने जब यह मुद्दा संसद में उठाया, तो मोदी सरकार ने मेरे सवालों को टालने की कोशिश की। सरकार के पास न बकाया रकम के बारे में कोई जानकारी है, न ही उसने देरी के कारणों पर कोई स्पष्ट जानकारी दी- बस इतना स्वीकार किया कि देरी होती है।’’

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राहुल गांधी के अनुसार, कैग ने हाल ही में कहा है कि ईसीएचएस को पर्याप्त धनराशि नहीं मिल रही है, लेकिन सरकार ने यह जवाब देने से मना कर दिया कि पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक धनराशि क्यों नहीं दी जा रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ उन्होंने दिव्यांग पूर्व सैनिकों के लिए कर में छूट से जुड़े मेरे सवाल को भी नजरअंदाज कर दिया, जबकि वित्त विधेयक में यह प्रस्ताव रखा गया है कि यदि कोई सैनिक सेवा में बना रहता है, तो उसकी दिव्यांगता पेंशन पर कर लगाया जाएगा। यह कदम उन सैनिकों को सजा देने जैसा है जो (दिव्यांगता के बाद भी) देश की सेवा जारी रखते हैं।’’

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