

जस्टिस कृष्ण राव ने सुनाया अपना फैसला
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट ने एक दंपति को आदेश दिया है कि उसे गोद लिए बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को वापस करना पड़ेगा। बच्चे की मां ने हाई कोर्ट में इस बाबत एक पिटीशन दाखिल किया था। जस्टिस कृष्णा राव ने मामले की सुनवाई के बाद उपरोक्त आदेश दिया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने इस बच्चे को लावारिस घोषणा करने के बाद इसे गोद देने का आदेश दिया था। एडवोकेट घनश्याम पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह बच्चा 2023 के मार्च में एक ड्रेन में पड़ा हुआ पाया गया था। लोग बच्चे को एनआरएस अस्पताल ले गए थे। यहां इलाज के दौरान उसकी मां भी अस्पताल गई थी और बच्चे को वापस देने का आवेदन किया था। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने बच्चे को लावारिस करार देते हुए फैसला सुना दिया था कि बच्चे के माता-पिता उसका पालन पोषण करने के काबिल नहीं है। इसके बाद स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी को आदेश दिया था कि वह इस बच्चे को किसी को गोद सौंप दे। परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ विवाह के बाद इस बच्चे का जन्म हुआ था। बच्चे की बेहतरी का ख्याल रखते हुए पुलिस ने उसे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बच्चे के माता-पिता को नाकाबिल घोषणा करते समय कानून का अनुकरण नहीं किया गया था। बस एक आदेश भर दे दिया गया था।
इसी आधार पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी ने बच्चे को गोद दिए जाने का आदेश दे दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि इस मामले में एक कानून है और उसका अनुकरण नहीं किया गया था। कमेटी ने बच्चे के माता-पिता के माली हालत की जांच भी नहीं की थी। उनकी सामाजिक हैसियत के बाबत कोई रिपोर्ट भी नहीं मांगी गई थी। कोर्ट ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश और गोद देने की प्रक्रिया को भी खारिज कर दिया है। इसके साथ ही आदेश दिया है कि गोद लिए गए बच्चे को वापस चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंप दिया जाए। कमेटी पूरे मामले की नए सिरे से जांच करेगी और इसके बाद कानून के अनुसार फैसला लेगी।