

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने घोषणा की है कि विपक्ष राज्यसभा के उपसभापति पद के चुनाव का बहिष्कार करेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकसभा में पिछले सात वर्षों से उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के विरोध में लिया गया है।
रमेश ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर सरकार ने विपक्ष से कोई सार्थक परामर्श नहीं किया। उन्होंने कहा कि उपसभापति के चुनाव को लेकर जो प्रक्रिया अपनाई गई है, वह परंपराओं के विपरीत है।
उन्होंने “हरिवंश 3.0” का जिक्र करते हुए कहा कि उम्मीद है कि हरिवंश यदि फिर से इस पद पर आते हैं, तो विपक्ष के सुझावों के प्रति अधिक संवेदनशील रहेंगे।
रमेश ने यह भी कहा कि पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि राष्ट्रपति द्वारा नामित किसी सदस्य को उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाया गया हो।
उन्होंने बताया कि विपक्ष के इस फैसले के पीछे तीन मुख्य कारण हैं—लोकसभा में उपाध्यक्ष पद खाली रहना, उपसभापति के चयन की प्रक्रिया पर आपत्ति, और सरकार द्वारा विपक्ष से संवाद की कमी।
राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव 17 अप्रैल को होना है। सत्तारूढ़ एनडीए एक बार फिर हरिवंश को इस पद पर निर्वाचित कराने की कोशिश में है।
हरिवंश का पिछला कार्यकाल समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पुनः राज्यसभा के लिए नामित किया था। वहीं, सरकार की ओर से जेपी नड्डा विभिन्न दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।