तेल सस्ता, फिर भी महंगा पड़ेगा पेट्रोल-डीजल! कीमतें घटने की उम्मीद क्यों धुंधली

क्रूड में गिरावट के बावजूद कंपनियों पर भारी घाटा, 11-14 रुपये तक और बढ़ सकते हैं दाम
तेल सस्ता, फिर भी महंगा पड़ेगा पेट्रोल-डीजल! कीमतें घटने की उम्मीद क्यों धुंधली
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में प्रगति के संकेत मिलने से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 5.4% टूटकर 97.97 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया, जबकि WTI भी 92 डॉलर के नीचे फिसल गया। इससे उम्मीद जगी कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खुलने के बाद सप्लाई सामान्य होगी और कीमतों में राहत मिलेगी।

लेकिन भारत में तस्वीर अलग नजर आ रही है। यहां पिछले 10 दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 7.50 रुपये तक बढ़ चुके हैं, और फिलहाल राहत की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।

दरअसल, तेल कंपनियां अभी भी भारी घाटे में चल रही हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान कच्चा तेल 70 डॉलर से बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस दौरान कंपनियों ने 76 दिनों तक कीमतें नहीं बढ़ाईं और महंगे आयात का बोझ खुद उठाया।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की लागत में करीब 39% तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि खुदरा कीमतों में सिर्फ 3-7% का इजाफा हुआ है। ऐसे में कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम सैद्धांतिक रूप से 11 से 14 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाने पड़ सकते हैं।

इसके अलावा, भले ही कीमतें अभी थोड़ी घटी हों, लेकिन होर्मुज क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। समुद्री बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई लागत भी काफी बढ़ चुकी है, जिसका असर अंततः उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा।

मौजूदा स्थिति में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 10 रुपये और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। ऐसे में वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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