पूर्वोत्तर में कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के इस्तीफे की मांग

असम में सांसद गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया मणिपुर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा
पूर्वोत्तर में कांग्रेस का प्रदर्शन, सीईसी के इस्तीफे की मांग
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गुवाहाटी/ईटानगर/इंफाल : विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन का असर शुक्रवार को पूर्वोत्तर में भी दिखाई दिया। असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। असम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद गौरव गोगोई समेत कई वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि मणिपुर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा।

ईटानगर में एसआईआर रोकने की मांग

ईटानगर में प्रदेश कांग्रेस ने निर्वाचन भवन के पास प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रोकने, मतदाता सूची से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने और जांच पूरी होने तक आगामी चुनाव स्थगित रखने की मांग उठाई। प्रदेश कांग्रेस ने एसआईआर से संबंधित सभी फाइलों को उच्चतम न्यायालय के पास सुरक्षित रखने तथा कुमार के खिलाफ आपराधिक मामला चलाने की भी मांग की। अधिकारियों के मुताबिक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और इस दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

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मणिपुर में पुतला फूंका, आंसू गैस चली

इंफाल में मणिपुर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाए और उनके इस्तीफे के साथ गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कुछ गोले दागे। कांग्रेस ने कुमार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के दौरान जेन-जी मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के 1988 में मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष किए जाने का उल्लेख किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि एक प्रधानमंत्री ने युवाओं को मतदान का अधिकार दिया था, जबकि वर्तमान सरकार उस अधिकार को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया का समर्थन कर रही है। यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप है, न कि निर्वाचन आयोग द्वारा स्वीकार किया गया तथ्य।

असम में गौरव गोगोई समेत नेता हिरासत में

गुवाहाटी में असम प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई के नेतृत्व में राजीव भवन से मार्च निकाला। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे और वहां सीईसी का पुतला जलाने की योजना थी। राजीव भवन के पास पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। पुलिस के अनुसार, गोगोई और अन्य प्रदर्शनकारी नेताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए नेताओं में कांग्रेस सचिव मनोज चौहान, सेवा दल अध्यक्ष दीप बयान तथा प्रदेश कांग्रेस महासचिव उदित भानु दास सहित कई अन्य नेता शामिल थे। कांग्रेस प्रवक्ता बेदव्रत बोरा ने नेताओं को कथित रूप से बलपूर्वक हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। वहीं पुलिस ने कार्रवाई को प्रदर्शनकारियों द्वारा बैरिकेड पार करने की कोशिश से जोड़कर बताया है।

एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल

पूर्वोत्तर में कांग्रेस के प्रदर्शन ऐसे समय हुए हैं, जब एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों की एक रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दों से जोड़ा गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि आयोग में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि एसआईआर सहित उसके सभी फैसलों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और वे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।

पूर्वोत्तर में मुद्दे का राजनीतिक असर

असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में शुक्रवार के प्रदर्शन से स्पष्ट है कि एसआईआर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा राजनीतिक विवाद पूर्वोत्तर तक पहुंच गया है। तीनों राज्यों में कांग्रेस ने अलग-अलग तरीके से निर्वाचन आयोग के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। जहां अरुणाचल में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, वहीं मणिपुर में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी तथा असम में प्रमुख कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस की ओर से एसआईआर रोकने और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग अपने फैसलों को वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है। इस तरह पूर्वोत्तर में शुक्रवार के विरोध-प्रदर्शन ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस को क्षेत्रीय राजनीतिक विमर्श का भी हिस्सा बना दिया है।

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