

नई दिल्लीः सरकार ने बुधवार को लोकसभा में ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया जिसका मकसद विदेश से अंशदान हासिल करने को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने यह विधेयक पेश किया। उन्होंने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि वैध तरीके से काम करने वाली संस्थाओं के लिए कोई बाधा पैदा नहीं होगी, लेकिन उन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी जो भारत की संप्रभुता और देशहित के अनुरूप काम नहीं करेंगे। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सदन के कार्य संचालन के नियम 72 (1) के तहत विधेयक पेश किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल ने दावा किया कि यह विधेयक समाज के हित में काम करने वाली संस्थाओं के लिए खतरनाक है। राय ने विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य वैध गतिविधियों को बाधित करना नहीं, बल्कि विदेश अंशदान की प्रक्रिया को जवाबदेही और पारदर्शी बनाना है।
उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और देशहित में काम करने वाले संस्थानों के कार्यों में कोई अवरोध पैदा नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत काम करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने तृणमूल सांसद पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘जिनकी नीयत में खोट होगी, उनके लिए यह विधेयक खतरनाक है।’’ उन्होंने कहा कि जो विदेशी अंशदान के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना चाहते हैं और निजी लाभ उठाना चाहते हैं, उनके लिए यह विधेयक खतरनाक है।