

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की सामाजिक कल्याण योजनाओं को लेकर नई पात्रता शर्तों का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद और पात्र लोगों को मिलेगा। इसके तहत दो से अधिक बार शादी करने वाले, सरकारी टीकाकरण से इनकार करने वाले, सरकारी स्कूल छोड़कर कुछ विशेष धार्मिक शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले और गैर-भारतीय नागरिकों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया जाएगा।
उत्तरी बंगाल में वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना है, न कि नियमों की अनदेखी करने वालों को लाभ देना।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह नीति नई नहीं है। 9 मई को शपथ लेने के बाद भी उन्होंने कई जनसभाओं में कहा था कि जो लोग सरकार की स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी नीतियों का पालन नहीं करते, उन्हें सरकारी आर्थिक सहायता का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
हाल ही में शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना की समीक्षा के दौरान भी मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जिन परिवारों ने बच्चों का अनिवार्य टीकाकरण नहीं कराया है या इसमें लापरवाही बरती है, उन्हें योजना के लिए अयोग्य माना जाएगा।
अन्नपूर्णा योजना के 11 पन्नों वाले आवेदन पत्र में आवेदकों से बच्चों के टीकाकरण की स्थिति, स्कूल का प्रकार (सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी या मदरसा) और परिवार को मिल रही अन्य सरकारी योजनाओं का विवरण भी मांगा गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बच्चों का टीकाकरण राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। राज्य में 92.3% से 99.4% बच्चों का टीकाकरण हो चुका है और यह अभियान केंद्र सरकार के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसके जरिए 12 गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए मुफ्त टीके उपलब्ध कराए जाते हैं।